भारत में पिछले 10 वर्षों में वार्षिक अंग प्रतिरोपण में तीन गुना से अधिक वृद्धि
मनीषा प्रशांत
- 05 Aug 2024, 03:29 PM
- Updated: 03:29 PM
नई दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रतिरोपण संगठन (एनओटीटीओ) की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में एक वर्ष में अंग प्रतिरोपण में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई है और सर्वाधिक मामले गुर्दा प्रतिरोपण के हैं।
एनओटीटीओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में भारत में कुल 18,378 प्रतिरोपण किए गए। यह आंकड़ा भारत को अंग प्रतिरोपण में दुनिया में तीसरे स्थान पर और कॉर्निया प्रतिरोपण में दूसरे स्थान पर रखता है। यह रिपोर्ट शनिवार को जारी हुई है।
देश में जीवित दाताओं और मृत दाताओं दोनों के अंगों से प्रतिरोपण सहित कुल प्रतिरोपणों की संख्या 2013 में 4,990 दर्ज की गई थी। एनओटीटीओ ने कहा कि भारत 2023 में एक और उपलब्धि हासिल की है। देश में पहली बार एक वर्ष में मृतकों के 1,000 से अधिक अंग दान किए गए और पिछले साल का रिकॉर्ड टूट गया।
मृतक-दाताओं से मिले अंगों के प्रतिरोपण की संख्या 2013 में 837 थी जो 2023 में बढ़कर 2,935 हो गई। आंकड़ों के अनुसार, 2023 में गुर्दा प्रतिरोपण की संख्या 13,426 थी, जबकि जिगर प्रतिरोपण की 4,491, हृदय प्रतिरोपण की 221, फेफड़े प्रतिरोपण की 197 और अग्न्याशय प्रतिरोपण की संख्या 2023 में 27 थी।
जीवित दाताओं में, 2023 में महिलाओं की संख्या 9,784 जबकि पुरुषों की संख्या 5,651 थी। हालांकि, मृतक दाताओं में, पुरुषों की संख्या 844 जबकि महिलाओं की संख्या 255 थी। 2023 में जीवित दाताओं की कुल संख्या 15,436 तथा मृतक दाताओं की संख्या 1,099 थी।
तेलंगाना में 2023 में मृतक दाताओं की संख्या सबसे अधिक 252 थी। उसके बाद तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों में 178, महाराष्ट्र में 148, गुजरात में 146 और दिल्ली में 66 मृतक दाता थे।
बीते बरस, विदेशियों को किए गए अंग प्रतिरोपण की संख्या 1,851 दर्ज की गई, जिनमें से दिल्ली में 1,445 थे।
हृदय प्रतिरोपण की संख्या 2013 में 30 थी जो बढ़कर 2023 में 221 हो गई। 2018 में सर्वाधिक 241 हृदय प्रतिरोपण किए गए थे।
मृतक दाता से मिले अंग प्रतिरोपण के मामले मे 2023 में तमिलनाडु 595 प्रतिरोपण के साथ शीर्ष पर रहा। उसके बाद तेलंगाना में 546, कर्नाटक में 471, महाराष्ट्र में 426 और गुजरात में 421 ऐसे अंग प्रतिरोपित किए गए जो मृतक अंग दाताओं से मिले थे।
जीवित अंग दाताओं से मिले अंगों के प्रतिरोपण में दिल्ली-एनसीआर पहले स्थान पर है जहां सबसे अधिक 4,275 प्रतिरोपण हुए। उसके बाद तमिलनाडु में 1,833, महाराष्ट्र में 1493, केरल में 1,376 और पश्चिम बंगाल में 1,021 प्रतिरोपण ऐसे हुए जिनमें अंग जीवित अंग दाताओं से मिले।
एनओटीटीओ की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हमारे देश में अंगदान की दर अब भी प्रति दस लाख की आबादी पर एक से कम है। ’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर-संचारी और जीवनशैली संबंधी बीमारियों के कारण, अंतिम चरण में अंगों की विफलता से पीड़ित रोगियों की बड़ी संख्या के कारण प्रतिरोपण के लिए अंगों की जरूरत बहुत ज्यादा है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए मृतक व्यक्तियों के अंग दान को बढ़ावा देने की जरूरत है।
इसमें कहा गया है कि हृदय की धड़कन रुकने से पहले, दिमागी तौर पर मृत व्यक्ति के अंग दान किए जा सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अंग दान के बारे में कई मिथक और गलत धारणाएं हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इसमें कहा गया है कि प्रतिरोपण के लिए मृतक-दाता के अंग लेने वालों के पंजीकरण के लिए राज्य का निवासी होने की शर्त को हटा दिया गया है और राज्यों को भी यह सुधार लागू करने के लिए कहा गया है। साथ ही, मृतक-दाता अंगों के प्राप्तकर्ताओं के पंजीकरण के लिए ऊपरी आयु सीमा को भी हटा दिया गया है यानी अब किसी भी उम्र का व्यक्ति पंजीकरण करा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मृतक-दाता के अंग प्राप्त करने वाले रोगियों के पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक परिपत्र भी जारी किया है कि चिकित्सा-कानूनी मामलों में अंग दान की सुविधा के लिए, पर्याप्त बुनियादी ढांचे वाले अस्पतालों में पोस्टमार्टम के लिए चौबीसों घंटे सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
इसके अलावा, देश के लिए एक समान अंग परिवहन नीति विकसित करने के वास्ते नीति आयोग के समन्वय से सात मंत्रालयों - नागरिक उड्डयन मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय, रेल मंत्रालय, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ परामर्श किया गया।
इसमें कहा गया है कि मानक संचालन प्रक्रियाओं का एक मसौदा तैयार किया गया है, जिसके मुताबिक प्रत्येक संबंधित मंत्रालय के पास एक नोडल अधिकारी होगा और राज्य अंग और ऊतक प्रतिरोपण संगठन (एसओटीटीओ) अंग परिवहन की सुविधा के लिए एक नोडल अधिकारी के साथ समन्वय करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हवाई अड्डे पर अंगों की कोई जांच नहीं की जाएगी।
भाषा मनीषा