तीन नए आपराधिक कानून 21वीं सदी का सबसे बड़ा सुधार साबित होंगे: शाह
जितेंद्र शफीक
- 04 Aug 2024, 11:26 PM
- Updated: 11:26 PM
(तस्वीरों के साथ)
चंडीगढ़, चार अगस्त (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को केंद्र द्वारा लाये गये तीन नए आपराधिक कानूनों को 21वीं सदी का ‘‘सबसे बड़ा’’ सुधार करार दिया।
उन्होंने कहा कि इन कानूनों - भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक और तकनीक से युक्त आपराधिक न्याय प्रणाली भारत की होगी।
शाह यहां तीन नये आपराधिक कानूनों के लिए ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय सेतु और न्याय श्रुति ऐप का लोकार्पण करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
एक जुलाई को प्रभावी हुए बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए ने क्रमशः ब्रिटिशकालीन भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।
शाह ने कहा कि चंडीगढ़ देश की पहली प्रशासनिक इकाई होगी, जहां अगले दो माह में तीनों कानूनों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली को संचालित करने वाले ये नये कानून 21वीं सदी का ‘‘सबसे बड़ा’’ सुधार है।
गृह मंत्री ने कहा कि इन कानूनों में तकनीक को इस प्रकार से शामिल किया गया है कि आने वाले 50 साल तक ईजाद होने वाली सारी तकनीक को इसमें समाहित कर लिया गया है।
शाह ने कहा कि हमारे संविधान की भावना के अनुसार नागरिक केंद्रित कानून बनाए गए हैं और इनका पूर्ण क्रियान्वयन होने के बाद किसी भी मामले में उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष में फैसला आ जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए, संसद में चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा भारत की जनता के लिए बनाए गए कानून हैं। इसमें भारत की मिट्टी की खुशबू है और हमारे न्याय की संस्कृति भी है।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि 150 साल पहले बने कानून प्रासंगिक नहीं रह सकते।
शाह ने कहा कि वर्षों तक लोगों को न्याय नहीं मिलता था और तारीख पर तारीख मिलती थी।
गृह मंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे लोगों का विश्वास तंत्र पर से उठता जा रहा था इसीलिए मोदी सरकार ने इन तीन नये कानूनों को लागू करने पर काम किया।
शाह ने कहा कि इन कानूनों में दंड का कोई प्रावधान नहीं है बल्कि इनका उद्देश्य लोगों को न्याय देना है इसीलिए ये दंड संहिता नहीं बल्कि न्याय संहिता है।
शाह ने कहा कि संविधान सिर्फ एक किताब नहीं है, बल्कि यह एक भावना है। उन्होंने कहा, ‘‘हर व्यक्ति को न्याय मिले, यह सुनिश्चित करना संविधान की जिम्मेदारी है। संविधान की इस भावना को जमीन पर उतारने का माध्यम हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली है।’’
उन्होंने कहा कि इन तीनों नये कानूनों में काफी बदलाव किये गये हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘आप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राथमिकी दर्ज करा सकेंगे। इस कानून में ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालना) को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि अब यहां अपराध करने के बाद देश से भागना आसान नहीं होगा।
शाह ने कहा, “पहले जो लोग देश छोड़कर भाग जाते थे, उनके मामले वर्षों तक लंबित रहते थे लेकिन अब भगोड़ा घोषित होने के बाद उनकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलेगा और उन्हें सजा भी मिलेगी। अगर वे अपील करना चाहते हैं, तो उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा और उच्च न्यायालय जाना होगा।”
उन्होंने कहा कि कई लोग यहां अपराध करने के बाद देश छोड़कर भाग गए और अब वे कानून की पहुंच से बाहर हैं।
उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसा प्रयास करता है तो उसे यहां दंडित किया जाएगा।”
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने आठ फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय स्थापित किए हैं तथा आठ और बनाए जाएंगे।
भाषा जितेंद्र