दिल्ली के उपराज्यपाल ने निजामुद्दीन में नालों का निरीक्षण किया, स्थिति ‘शर्मनाक’ बतायी
राजकुमार रंजन
- 04 Aug 2024, 09:18 PM
- Updated: 09:18 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने निजामुद्दीन क्षेत्र में गाद, कीचड़ और मलबे से भरे तीन मुख्य नालों का रविवार को निरीक्षण किया तथा उनकी स्थिति ‘भयावह एवं शर्मनाक’ बतायी। राजनिवास के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उपराज्यपाल पर पलटवार करते हुए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बयान में कहा, ‘‘अब जब मानसून लगभग खत्म हो चुका है, तो उपराज्यपाल सिर्फ जुबानी जमाखर्च और गंदी राजनीति के लिए आगे आए हैं। बेहतर होता कि उपराज्यपाल मुख्य सचिव और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के साथ-साथ गलत कामों में शामिल अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अभी भी समय है कि उपराज्यपाल मुख्य सचिव नरेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करें, अन्यथा बाकी सब सिर्फ फोटो खिंचवाने का अवसर है और खुल्लम खुल्ला राजनीति एवं जुबानी जमाखर्च है।’’
‘एक्स’ पर कई पोस्ट में सक्सेना ने कहा कि उन्होंने आज बारापुला, कुशक और सुनहरी नालों तथा निजामुद्दीन स्थित ऐतिहासिक बारापुला पुल का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जमीनी हकीकत भयावह और शर्मनाक है। बाढ़ को कम करने के लिए पानी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधार के कदम उठाये जाने की आवश्यकता है।’’
सक्सेना ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट के साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न कीं और कहा कि ये ‘संबंधित अधिकारियों और उनके नेतृत्व की आपराधिक उपेक्षा और नासमझी भरी उदासीनता की कहानी बयां करती हैं।’
ये तीनों मुख्य नाले सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग तथा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अंतर्गत हैं। उन्होंने कहा कि ये नाले बरसाती पानी को यमुना में ले जाते हैं तथा दावों के विपरीत, वर्षों से इनसे गाद नहीं निकाला गया है तथा न ही इन्हें साफ किया गया है।
उपराज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान उनके साथ मौजूद अधिकारियों को इन नालों से तत्काल गाद हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने उन्हें एक सप्ताह के अंदर बारापुला से अतिक्रमण हटाने और पुल को उसके मूल स्वरूप में लाने का भी निर्देश दिया।
बाद में, एक नोट में राज निवास के अधिकारी ने कहा कि सक्सेना "इन नालों की दयनीय स्थिति को देखकर स्तब्ध थे, जो मलबे, गाद और निर्माण और विध्वंस के कचरे से भरे हुए थे।"
अधिकारियों ने कहा कि नालों से जुड़ी एमसीडी और सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण जैसी एजेंसियों के अधिकारियों के साथ, उन्होंने इन नालों से गाद निकालने के काम की शुरुआत का निरीक्षण किया एवं एजेंसियों को 15 दिनों के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया।
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पार्टी ने एक बयान में कहा, "शहरी विकास (यूडी) मंत्री चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव (सीएस) को यह जिम्मेदारी दी है कि वह सुनिश्चित करें कि दिल्ली में जलभराव न हो और सभी एजेंसियों द्वारा नालों की उचित सफाई हो।"
उसने दावा किया, ‘‘लेकिन मुख्य सचिव ने इन निर्देशों की अनदेखी की। जब शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज ने नालों की सफाई की सूची के बारे में पूछा तो मुख्य सचिव ने उनके आदेशों की भी अनदेखी की।"
भाषा राजकुमार