द्रमुक सदस्य ने राज्यसभा में सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए पीपीपी मॉडल अपनाने की मांग उठाई
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र मनीषा
- 02 Aug 2024, 02:53 PM
- Updated: 02:53 PM
नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) राज्यसभा सदस्य कनिमोझी एनवीएन सोमू ने कभी सूखे की स्थिति तो कभी अप्रत्याशित बारिश और बाढ़ से जानमाल को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने की मांग उठाई।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सदस्य ने कहा कि मौसम के बेहतर पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी की प्रारंभिक जिम्मेदारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पास है।
उन्होंने कहा कि मौसम विभाग को कई अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए पीपीपी मॉडल अधिक उपयुक्त है ताकि वह पहले से ही सटीक मौसम पूर्वानुमान की दिशा में काम कर रही वैश्विक निजी क्षेत्र की कंपनियों की विशेषज्ञता का लाभ उठा सके।
सोमू ने कहा कि मौसम डेटा संग्रह के लिए मालिकाना सेंसर रखने वाली निजी संस्थाएं, परिष्कृत मॉडल चलाती हैं और वैश्विक डेटा का विश्लेषण करने के लिए सुपर कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत पीपीपी मॉडल का उपयोग करके भविष्य में चरम मौसम की घटनाओं के लिए बेहतर तैयारी कर सकता है और नुकसान को कम कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई प्रसिद्ध कंपनियां हैं जो अपने स्वयं के सेंसर नेटवर्क के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और बड़े डेटा विश्लेषण के मॉडल का उपयोग करती हैं।’’
द्रमुक सदस्य ने कहा, ‘‘इसलिए, मैं सरकार से मौसम पूर्वानुमान के लिए पीपीपी मॉडल स्थापित करने का आग्रह करती हूं, जो आने वाले दशकों में भारत की प्रगति के लिए बहुत जरूरी है। इसे तुरंत अपनाया जाना चाहिए।’’
शून्यकाल में भाजपा के महाराजा संजोओबा लेशंबा ने मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के लिए जारी बुनियादी ढांचे के काम में तेजी लाने की मांग की।
खेलों और खेलों में मणिपुर के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मणिपुर में एक विश्व स्तरीय राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह देश में अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय होगा।’’
लेशंबा ने आगे कहा कि इसके निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि मिलने के बाद भी ढांचागत निर्माण और अन्य संबंधित गतिविधियों की प्रगति बहुत धीमी है।
उन्होंने कहा, ‘‘देरी के कई कारण हो सकते हैं लेकिन देश भर में हमारे खिलाड़ियों के हित में इसे किसी भी कीमत पर जल्दी पूरा किया जाना चाहिए।’’
भाजपा सदस्य ने कहा, ‘‘इसलिए, मैं विनम्रतापूर्वक केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय से राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के चल रहे संरचनात्मक कार्यों में तेजी लाने का आग्रह करता हूं ताकि यह जल्द से जल्द पूरी तरह सेवा के लिए उपलब्ध हो सके।’’
देश का पहला राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर को 643.34 करोड़ रुपये की कुल स्वीकृत लागत पर आवंटित किया गया है।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र