वाल्मीकि ‘घोटाले’ की जांच सीबीआई से कराने के मामले में जवाब दखिल करे कर्नाटक सरकार : उच्च न्यायालय
जोहेब धीरज
- 23 Jul 2024, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
बेंगलुरु, 23 जुलाई (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
याचिका में अदालत से सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह सरकारी निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में बैंक के खिलाफ जारी एसआईटी जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित करे।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने आगे की सुनवाई के लिए सात अगस्त की तारीख तय की है।
बैंक की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि बैंकिंग संस्थानों की अखंडता महत्वपूर्ण है।
बैंकिंग कार्यों के विनियमन और अनुपालन सुनिश्चित करने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे धोखाधड़ी के मामलों को सीबीआई को भेजें, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके, खासकर उन मामलों में जो राज्य की सीमाओं से परे हों।
अदालत ने वेंकटरमणि की दलील को स्वीकार किया जिसमें सुझाव दिया गया कि राज्य को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के बैंक फैसले के समर्थन करना चाहिए।
महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने याचिका पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।
राज्य सरकार ने जांच के लिए आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) में आर्थिक अपराध के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मनीष खरबीकर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
निगम ने धन के गबन को लेकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी एमजी रोड शाखा से जुड़े निगम के धन के गबन के संबंध में सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद प्रमुख जांच एजेंसी ने जांच शुरू की।
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से जुड़ा अवैध धन हस्तांतरण मामले का खुलासा निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. के 26 मई को आत्महत्या करने से पहले छोड़े गए नोट के माध्यम से हुआ था।
नोट में खुलासा किया गया कि निगम के 187 करोड़ रुपये उसके बैंक खाते से अनधिकृत रूप से स्थानांतरित कर दिए गए तथा उसमें से 88.62 करोड़ रुपये अवैध रूप से विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिए गए, जो कथित रूप से ‘प्रसिद्ध’ आईटी कंपनियों तथा हैदराबाद में स्थित एक सहकारी बैंक व अन्य के खाते में स्थानांतरित किए गए।
घोटाले के सिलसिले में आरोप लगने के बाद अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने छह जून को पद से इस्तीफा दे दिया था। नागेंद्र को 12 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
भाषा जोहेब