जम्मू: सामाजिक-राजनीतिक दलों ने एलजी को अधिक शक्तियां देने के खिलाफ भूख हड़ताल की धमकी दी
प्रीति माधव
- 20 Jul 2024, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
जम्मू, 20 जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को दी गई अधिक शक्तियों के आदेश को लेकर कई सामाजिक-राजनीतिक दलों ने शनिवार को यहां एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने इस महीने के अंत तक यह आदेश वापस नहीं लिए जाने पर भूख हड़ताल करने की धमकी दी।
कई सामाजिक-राजनीतिक दलों द्वारा की गई बैठक में केंद्रशासित प्रदेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता जाहिर की गई तथा कठुआ एवं डोडा जिले में आतंकवादी हमले में शहीद हुए एक कैप्टन सहित नौ सैन्यकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई।
बैठक में पूर्व मंत्री और डोगरा सदर सभा के अध्यक्ष गुलचैन सिंह चरक, पूर्व सांसद शेख अब्दुल रशीद, कांग्रेस के नरेंद्र गुप्ता, नेशनल कॉन्फ्रेंस के विजय लोचन, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिंदर सिंह सोनू और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के राज्य प्रमुख मनीष साहनी शामिल हुए।
साहनी ने कहा, ''सर्वदलीय बैठक ने सर्वसम्मति से केंद्र के (12 जुलाई के) आदेश को खारिज कर दिया और विधानसभा चुनाव होने से पहले जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने के साथ ही उन्हें इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।''
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत बनाए गए नियमों में संशोधन करके उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां प्रदान कीं।
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ पारित इस अधिनियम ने पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया।
केंद्र सरकार द्वारा उपराज्यपाल को दी गई अधिक शक्तियों के जरिए अब वह पुलिस और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों से संबंधित जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय ले सकते हैं। साथ ही उन्हें विभिन्न मामलों में अभियोजन के लिए मंजूरी देने का भी अधिकार मिल गया है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता ने कहा, ''हम चाहते हैं कि यह आदेश तत्काल वापस लिया जाए और इसके लिए हम 30 जुलाई तक इंतजार करेंगे। हम फिर से बैठेंगे और हर गली-मोहल्ले में सड़क पर विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ भूख हड़ताल करने की रणनीति तैयार करेंगे।''
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पिछले पांच वर्षों से विधानसभा चुनाव और राज्य का दर्जा बहाल होने का इंतजार कर रहा है।
साहनी ने कहा, ''जब उच्चतम न्यायालय द्वारा जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने की तय की गई समयसीमा नजदीक आ रही है, तो केंद्र सरकार लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों को शक्तिहीन करने के लिए यह आदेश लेकर आई है। यह उपराज्यपाल के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पर शासन करने के लिए जानबूझकर किए गए कदम के समान है।''
उन्होंने कहा कि 30 जुलाई के बाद भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा।
भाषा प्रीति