प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप ‘बड़े महासागरीय देश’ हैं : विदेश मंत्री जयशंकर
गोला मनीषा
- 15 Jul 2024, 03:03 PM
- Updated: 03:03 PM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत प्रशांत द्वीप समूह के विकास के प्रयासों का समर्थन करना अपनी जिम्मेदारी मानता है।
जयशंकर ने एक कार्यक्रम में यह भी कहा कि प्रशांत क्षेत्र के द्वीप ‘‘छोटे द्वीप’’ नहीं हैं, बल्कि ‘‘बड़े महासागरीय देश’’ हैं और भारत को उनका भागीदार बनने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सतत विकास की तलाश में प्रशांत द्वीप समूह का समर्थन करना अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य सेवा आम चुनौतियां हैं जिनसे हमें मिलकर निपटने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपने हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ और अधिक काम करने के लिए हमेशा तैयार हैं।’’
जयशंकर ने डिजिटल माध्यम से हुए एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियां कीं। इस कार्यक्रम में भारत ने मार्शल द्वीप में चार सामुदायिक विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि इन परियोजनाओं में ऐलुक एटोल में एक सामुदायिक खेल केंद्र, मेजित द्वीप पर हवाई अड्डा टर्मिनल, अर्नो और वोट्जे एटोल में सामुदायिक केंद्र शामिल हैं। ये निश्चित रूप से मार्शल द्वीप के लोगों को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और मार्शल द्वीप गणराज्य के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का एक लंबा इतिहास है, जिसका पिछले कुछ वर्षों में भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) के तत्वाधान में विस्तार हुआ है।
एफआईपीआईसी भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग के लिए एक प्रमुख ढांचे के रूप में उभरा है।
जयशंकर ने तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रशांत द्वीप समूह के लिए भारत की ‘‘ठोस’’ प्रतिबद्धताओं की घोषणा का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें हासिल करने की दिशा में प्रगति देखकर खुश हूं। हम मार्शल द्वीप गणराज्य के लिए विलवणीकरण (पानी से नमक और अन्य खनिजों को अलग करने वाली) इकाइयों और डायलिसिस मशीनों के संबंध में प्रस्तावों पर भी काम कर रहे हैं।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत प्रशांत द्वीप देशों की प्राथमिकताओं और जरूरतों को पहचानता है।
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य देखभाल और संबंधित बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता और सस्ती दवाएं, अच्छी जीवन शैली, उत्कृष्टता केंद्र, शिक्षा और क्षमता निर्माण, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र का विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ जल सुविधाएं - ये सभी हमारे सहयोग के कुछ मुख्य क्षेत्र हैं।’’
भाषा गोला