अगले पांच साल में भारत का उत्थान गुरुत्वाकर्षण बल को चुनौती देने वाले रॉकेट जैसा होगा : धनखड़
प्रशांत अविनाश
- 12 Jul 2024, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
(तस्वीरों के साथ)
मुंबई, 12 जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि अगले पांच साल में भारत का विकास गुरुत्वाकर्षण बल को चुनौती देने वाले रॉकेट की तरह होगा। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रही वृद्धि का श्रेय वर्तमान पारदर्शी व जवाबदेह तंत्र को दिया।
भारत की उन्नति को सतत और निर्बाध बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां वैश्विक संस्थाएं अब उसे सलाह देने के बजाय उससे सलाह मांग रही हैं।
यहां नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस) विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते हुए धनखड़ ने कहा कि भारत को वैश्विक संस्थानों से प्रशंसा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “पहले भारत को सोता हुआ विशाल देश माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हम आगे बढ़ रहे हैं, हम सतत एवं निर्बाध प्रगति कर रहे हैं, और (हमें) वैश्विक संस्थानों से सराहना मिल रही है।”
देश के भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर पेश करते हुए धनखड़ ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत का विकास गुरुत्वाकर्षण बल को चुनौती देने वाले रॉकेट की तरह होगा।
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि भारत उस स्तर पर पहुंच गया है जहां वैश्विक संस्थाएं, जो कभी उसे सलाह देने का प्रयास करती थीं, अब उससे सुझाव मांग रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सब महज एक दशक में हुआ है।
उन्होंने कहा कि देश में निर्णय लेने की प्रक्रिया वर्तमान में पारदर्शी, जवाबदेह तंत्र से प्रेरित है और इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हुई है।
धनखड़ ने कहा कि 1990 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार लंदन और पेरिस जैसे शहरों के बराबर भी नहीं था। अब यह ब्रिटेन और फ्रांस की अर्थव्यवस्थाओं से भी आगे है।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हम अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी समारोह मनाएंगे (आज से 23 वर्ष बाद 2047 में)... ऐसे में विकसित भारत के स्वप्न के साथ हम पर गहन जिम्मेदारी भी होगी। उच्च शिक्षण संस्थान वह आधारशिला हैं जिन पर इस दृष्टिकोण को साकार किया जाएगा, जो न केवल ज्ञान बल्कि नवाचार, उद्यमशीलता और सामाजिक मूल्यों का भी पोषण करेंगे।
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