विदेश मंत्री जयशंकर दो दिवसीय सम्मेलन में बिम्सटेक के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेंगे
प्रशांत पवनेश
- 10 Jul 2024, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी में शुरू होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) के सदस्य देशों के अपने समकक्षों की मेजबानी करेंगे।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि यह सम्मेलन विदेश मंत्रियों के लिए सुरक्षा, संपर्क और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के अवसरों पर चर्चा करने का मौका प्रदान करेगा।
म्यांमा के उप प्रधानमंत्री यू थान स्वे इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा, “म्यांमा के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री यू थान स्वे का बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नयी दिल्ली पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समृद्ध, संबद्ध और सुरक्षित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर सार्थक चर्चा होगी।”
थान स्वे की भारत यात्रा म्यांमा में सैन्य जुंटा और विरोधी बलों के बीच भीषण लड़ाई की पृष्ठभूमि में हो रही है। विरोधी बलों ने पहले ही कई शहरों पर कब्जा कर लिया है।
बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों को बहुआयामी सहयोग के लिए एक साथ लाता है।
बिम्सटेक को क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक जीवंत मंच बनाने के लिए भारत ठोस प्रयास कर रहा है, क्योंकि दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के तहत पहल विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ रही थी।
भारत के अलावा बिम्सटेक में श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं।
एमईए ने कहा, “यह सम्मेलन बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों को अनौपचारिक रूप से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र और तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा, संपर्क, व्यापार और निवेश, लोगों के बीच संपर्क आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक तथा गहरा बनाने के अवसरों पर चर्चा करने का मौका प्रदान करेगा।”
बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 17 जुलाई, 2023 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित की गई थी।
छठा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन इस वर्ष थाईलैंड में आयोजित होने वाला है।
शिखर सम्मेलन में समुद्री परिवहन सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है, जिससे सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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