मप्र सरकार ने नये बाघ अभयारण्य में कथित तौर पर शिकार किये जाने, अनियमितता की जांच शुरू की
संतोष सुभाष
- 09 Jul 2024, 08:37 PM
- Updated: 08:37 PM
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में नवस्थापित वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य में बाघों का कथित तौर पर शिकार किये जाने और अन्य अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। आधिकारिक दस्तावेजों में यह जानकारी दी गई है।
यह राज्य का सातवां और भारत का 54वां अभयारण्य है। इसमें नौरादेही अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य के क्षेत्र शामिल हैं। भोपाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित यह अभयारण्य 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है जो तीन जिलों नरसिंहपुर, सागर और दमोह तक विस्तृत है।
एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि वन विभाग ने वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे के एक ईमेल के बाद जांच शुरू की है। दुबे ने इस बाघ अभयारण्य में बाघों के संरक्षण, बाघ सफारी और वन संपत्ति के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था।
वन विभाग ने बाघ अभयारण्य के उप निदेशक को जांच शुरू करने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। दुबे की शिकायत में दावा किया गया है कि दो बाघ (एन-113 और एन-112) अपने शावकों के साथ वर्ष 2021 से लापता हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन ने बाघिन एन-111 को गलत तरीके से बाघिन एन-112 घोषित कर दिया।
दुबे ने अपनी शिकायत में कहा कि अभयारण्य में बाघ का शिकार किये जाने की आशंका है और उन्होंने इस मामले की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इस बाघ अभयारण्य में कर्मियों और संसाधनों की कमी है जो भारत में चीता को फिर से बसाने के लिए चयनित किये गये स्थानों में से एक है।
उन्होंने वन कर्मियों की कथित मिलीभगत से नौरादेही अभयारण्य के बारा बीट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ों की कटाई और लकड़ी की ढुलाई किये जाने का भी आरोप लगाया।
लगभग 1,197 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य, मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा तथा पन्ना और सतपुड़ा बाघ अभयारण्यों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण गलियारा है।
नौरादेही अभयारण्य में बाघों को बसाने का प्रयास 2018 में इस वन्य जीव के एक जोड़े के साथ शुरू किया गया था। बाघों की संख्या अब 16 हो गई है जो वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य का हिस्सा हैं।
भाषा संतोष