लगभग सभी देशों में किया जा रहा एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से अधिक इस्तेमाल: अध्ययन
पवनेश
- 23 Jul 2026, 04:56 PM
- Updated: 04:56 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) किसी देश को आदर्श रूप से कौन-सी और कितनी एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए, इस संबंध में किए गए एक अध्ययन में पता चला कि लगभग सभी देशों में 'वॉच' श्रेणी की एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।
अध्ययन में पता चला है कि जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर बैक्टीरिया पर इन दवाओं का असर कम हो सकता है।
'वॉच' श्रेणी में ऐसी दवाएं शामिल हैं, जिन्हें केवल तब इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं काम न करें। यह अध्ययन 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
ब्रिटेन के लंदन विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसके बारे में उनका कहना है कि इससे देश यह आकलन कर सकेंगे कि एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग परिस्थितियों के अनुसार सही है या नहीं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह तरीका एंटीबायोटिक दवाओं के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और गलत तरह से इस्तेमाल, दोनों समस्याओं से निपटने में मदद कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एंटीबायोटिक दवाओं को उनकी क्षमता के आधार पर तीन समूहों 'एक्सेस' , 'वॉच' और 'रिजर्व' में बांटा है।
एक्सेस समूह की दवाएं, जैसे एमोक्सिसिलिन, आम संक्रमणों के इलाज में सबसे पहले दी जाती हैं, जबकि रिजर्व समूह की दवाएं सबसे आखिरी विकल्प होती हैं और उनका इस्तेमाल उन खतरनाक संक्रमणों में किया जाता है, जिन पर दूसरी दवाएं असर नहीं करतीं।
साल 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सहमति जताई कि डब्ल्यूएचओ की एक्सेस, वॉच, रिजर्व प्रणाली को दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की निगरानी का आधार बनाया जाए। साथ ही यह लक्ष्य रखा गया कि वर्ष 2030 तक दुनिया में इस्तेमाल होने वाली कम से कम 70 प्रतिशत एंटीबायोटिक दवाएं एक्सेस समूह की हों।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि किसी देश के लिए अलग-अलग लक्ष्य रखने का कोई तरीका सुझाया नहीं गया था, जबकि पहले के अध्ययनों में 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग का अनुमान लगाया जा चुका है।
अध्ययन के अनुमान की तुलना इक्विया मिडास डेटाबेस से प्राप्त 67 देशों के वास्तविक आंकड़ों से करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि लगभग तीन-चौथाई देशों में जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है।
शोधकर्ताओं ने लिखा, "हमारे विश्लेषण में जिन 67 देशों, क्षेत्रों और इलाकों के एंटीबायोटिक उपयोग के आंकड़े उपलब्ध थे, उनमें 72 प्रतिशत ने अनुमान से अधिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया और 99 प्रतिशत ने अनुमान से अधिक 'वॉच' एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया।"
अध्ययन के मुताबिक, जिन देशों और क्षेत्रों के वास्तविक आंकड़े उपलब्ध थे, उनमें आधे से ज्यादा 'रिजर्व' एंटीबायोटिक का पर्याप्त उपयोग नहीं कर रहे थे। इससे आशंका है कि दवा-प्रतिरोधी जानलेवा संक्रमण से पीड़ित मरीजों को जरूरत के मुताबिक उपचार नहीं मिल रहा है।
इसके अलावा, अध्ययन में पाया गया कि 60 प्रतिशत देश अब भी उन एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) अब मरीजों को देने की सलाह नहीं देता है।
भाषा जोहेब पवनेश
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