पश्चिम बंगाल सरकार लंबित कैग रिपोर्ट 25 जुलाई को विधानसभा में करेगी पेश: शुभेंदु अधिकारी
नरेश
- 22 Jul 2026, 04:37 PM
- Updated: 04:37 PM
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 22 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार 25 जुलाई को विधानसभा में कैग की सभी लंबित रिपोर्ट पेश करेगी और जहां भी ऑडिट में भ्रष्टाचार की बात सामने आएगी, वहां प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश करेगी, भले ही उसमें शामिल लोगों का पद और कद कितना भी ऊंचा क्यों न हो।
बजट सत्र के दौरान विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने वर्षों तक अनिवार्य कैग और लोकायुक्त रिपोर्ट सदन के समक्ष पेश नहीं कीं। उन्होंने इसे विधायी जवाबदेही का गंभीर उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा, ''विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश करना और उन पर विस्तार से चर्चा करना अनिवार्य है। इस सदन में सभी जानते हैं कि पिछली सरकार ने ऐसा नहीं किया था। सिर्फ कैग रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि लोकायुक्त की वार्षिक रिपोर्ट भी कभी पेश नहीं की गईं जबकि उन्हें विधानसभा के सामने पेश किया जाना जरूरी था।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार शनिवार को विधानसभा में कैग की सभी लंबित रिपोर्ट पेश करेगी और उनकी सिफारिशों पर कार्रवाई करने से पहले अगले सत्र में उनके निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा करेगी।
अधिकारी ने कहा, ''जहां भी कैग ने सबूतों के साथ भ्रष्टाचार का दस्तावेजीकरण किया है, हम सीधे राज्यपाल से प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश करेंगे। चाहे वह पूर्व मुख्यमंत्री हों, कोई मंत्री हों या कोई प्रभावशाली राजनीतिक नेता, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।''
इन बयानों से भाजपा सरकार का यह सबसे साफ संकेत मिलता है कि वह ऑडिट में मिली जानकारी का इस्तेमाल पिछली तृणमूल सरकार के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए करना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने से पहले 15 साल तक राज्य पर शासन किया था।
अम्फान चक्रवात के लिए राहत सामग्री बांटने में कथित गड़बड़ियों का ज़िक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस भयानक तूफान के बाद दो किश्तों में 3,750 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन बड़े पैमाने पर हेराफेरी के आरोपों के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने इन कथित गड़बड़ियों की विशेष कैग ऑडिट का आदेश दिया था, लेकिन रिपोर्ट न तो सार्वजनिक की गई और न ही विधानसभा में पेश की गई।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर कई संवैधानिक और कानूनी संस्थाओं को निष्क्रिय रखकर उन्हें निष्क्रिय बना देने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने इस सिलसिले में राज्य मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राज्य सूचना आयोग जैसी संस्थाओं का नाम लिया, जिनकी कथित तौर पर अनदेखी की गई थी।
भाषा
राजकुमार नरेश
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