अपने गांव कालुवास में मुक्केबाजी अकादमी स्थापित करने की योजना बना रहे हैं विजेंदर
नमिता
- 22 Jul 2026, 03:09 PM
- Updated: 03:09 PM
(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारत के पूर्व दिग्गज मुक्केबाज विजेंदर सिंह अब हरियाणा में अपने पैतृक गांव में एक ट्रेनिंग अकादमी बनाकर कोचिंग की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं और उन्होंने इस परियोजना के लिए खेल मंत्रालय से मदद मांगी है।
ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले इस पूर्व मुक्केबाज ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि उनका प्रस्ताव मंत्रालय के पास है। मंत्रालय 'राष्ट्रीय खेल विकास कोष' के जरिए मदद देने का फैसला करने से पहले प्रस्ताव की बारीकी से जांच कर रहा है।
उन्होंने कहा, ''हां, मैं अपनी मुक्केबाजी अकादमी खोलने की योजना बना रहा हूं। मैं खेल मंत्री मनसुख मांडविया से आग्रह करता हूं कि वह मेरे प्रस्ताव पर गौर करें। मैंने इसे लगभग दो साल पहले जमा किया था। मुझे उम्मीद है कि वह कुछ कोष जारी कर सकते हैं।''
विजेंदर जिस जमीन पर अकादमी बनाना चाहते हैं वह उनके गांव कालुवास (भिवानी) में है। भिवानी को लंबे समय से भारतीय मुक्केबाजी का गढ़ माना जाता है क्योंकि यहां से विजेंदर, एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज स्वर्गीय हवा सिंह, राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अखिल कुमार और विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले विकास कृष्ण जैसे कई बड़े मुक्केबाज निकले हैं।
चालीस साल के विजेंदर ने कहा, ''मैं उनके जवाब का इंतजार कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास अपनी जमीन है। मैंने उन्हें बताया था कि मैं अपनी मुक्केबाजी अकादमी खोलना चाहता हूं। इसलिए अच्छे नतीजे की उम्मीद है।''
मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि इतने बड़े पैमाने की परियोजना को स्वीकृति मिलने में लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और उनका प्रस्ताव भी अभी विचाराधीन है। मंत्रालय ने पहले भी खेल जगत के दिग्गजों की अकादमियों को आर्थिक मदद दी है, जिनमें पुलेला गोपीचंद और रोहन बोपन्ना प्रमुख हैं।
विजेंदर ने 2008 में जब बीजिंग ओलंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर देश भर में सुर्खियां बटोरीं तो सभी नजरें कालुवास पर टिक गईं।
उस समय उनके घर तक जाने वाली सड़क की मरम्मत की गई थी और पत्रकार इस छोटे से गांव में उनके शुरुआती सफर के हर पहलू को कवर करने पहुंचे थे।
अगर विजेंदर का सपना सच होता है तो यह उनके शानदार करियर के एक नए दौर की शुरुआत होगी। अपने करियर के चरम पर रहने के दौरान उन्होंने मिडिलवेट (75 किग्रा) वर्ग में एमेच्योर सर्किट में दबदबा बनाया और विश्व में नंबर एक मुक्केबाज बने।
वह 2015 में पेशेवर मुक्केबाज बने और अब तक 14 मुकाबलों में उन्हें सिर्फ एक बार मिली है।
विजेंदर ने अभी पेशेवर मुक्केबाजी से संन्यास नहीं लिया है जिससे उन्हें कुछ फायदे नहीं मिल पाए हैं।
उन्होंने कहा, ''मैंने उस सरकारी पेंशन के लिए आवेदन किया था जिसके लिए ओलंपिक पदक विजेता हकदार होते हैं। लेकिन मैंने पेशेवर सर्किट से संन्यास नहीं लिया है इसलिए मुझे वह पेंशन नहीं मिली।''
विजेंदर ने कहा, ''मैं अब ऐसा कोई आवेदन नहीं देने वाला। मैंने उसे छोड़ दिया है। मैं इसके बिना भी ठीक हूं।''
विजेंदर ने राजनीति में भी हाथ आजमाया है और 2019 में कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव लड़ा और फिर 2024 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
भाषा सुधीर नमिता
नमिता
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