रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत एफसीएनआर-बी प्रवाह में विदेशी बैंकों का हिस्सा का अधिक
अजय
- 21 Jul 2026, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
मुंबई, 21 जुलाई (भाषा) बैंक अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत जमा किए गए 17 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर-बी) जमा में विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी अधिक है।
बैंक अधिकारियों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अब तक आए कोष में सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बड़े और निजी क्षेत्र के बैंकों की बड़ी हिस्सेदारी है।
आरबीआई ने सोमवार को कहा था कि विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई उसकी रियायती अदला-बदली सुविधा ने 17 जुलाई तक 20.72 अरब डॉलर जुटाए हैं। इसमें 17.41 अरब डॉलर एफसीएनआर-बी से, 1.97 अरब डॉलर ओएफसीबी (विदेशी स्रोतों से विदेशी मुद्रा कर्ज) से और 1.34 अरब डॉलर बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) से आए।
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, कुल कोष में एफसीएनआर(बी) जमा का हिस्सा 17.41 अरब डॉलर है, जबकि ओएफसीबी का योगदान 1.97 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी का योगदान 1.34 अरब डॉलर था।
करूर वैश्य बैंक के उप-महाप्रबंधक और ट्रेजरी प्रमुख वी. रामचंद्र रेड्डी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''आरबीआई की एफसीएनआर (बी) योजना के तहत जमा किए गए कोष का बड़ा हिस्सा विदेशी बैंकों से आया हो सकता है। उसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बड़े बैंक और निजी क्षेत्रों के बैंकों का स्थान आता है। विदेशी बैंकों को विदेशी डॉलर वित्त पोषण आसानी से मिल जाता है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े और निजी क्षेत्र के बैंकों को गिफ्ट सिटी और विदेशी शाखाओं में अपनी मौजूदगी का लाभ मिलता है। इससे वे आरबीआई की अदला-बदली सुविधा का प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाते हैं।''
रेड्डी ने कहा, ''इसके उलट, ज्यादातर छोटे और मझोले बैंक, जिनकी विदेश में मौजूदगी या गिफ्ट सिटी में कामकाज बहुत कम या बिल्कुल नहीं है, वे मुख्य रूप से आम लोगों से मिलने वाले एफसीएनआर-बी जमा पर निर्भर रहते हैं।''
निजी बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि विदेशी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत उपस्थिति और विदेश से आसानी से कोष मिलने की वजह से लाभ मिलता है।
कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा, ''भारतीय रिजर्व बैंक की योजना के तहत कम समय में ही अच्छी-खासी रकम जमा हुई है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि एफसीएनआर (बी) में आया कितना पैसा नया है और कितना पुरानी जमा के नवीनीकरण या पहले की जमा आगे की अवधि लिए जमा के रूप में आई है।''
सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि एफसीएनआर (बी) में आया पैसा नई जमा और परिपक्व हो चुकी जमा की जगह आए पैसे का मिला-जुला रूप लगता है।
उन्होंने कहा, ''आरबीआई ने बैंकों से आंकड़ा मांगा है, लेकिन उसने खास तौर पर नई जमा के आंकड़े नहीं मांगे हैं। मेरा मानना है कि बताई गई संख्या में नया पैसा और परिपक्व हो चुकी जमा की जगह आया पैसा, दोनों शामिल हैं।''
केंद्रीय बैंक ने कहा कि आठ जून, 2026 को शुरू होने के बाद से अदला-बदली सुविधा में लोगों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है और विदेशी मुद्रा का लगातार प्रवाह हुआ है। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा में काफी अच्छी वृद्धि देखी गई है।
आरबीआई ने भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने और पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने के कई उपायों के तहत पांच जून, 2026 को यह अदला-बदली सुविधा पेश की थी।
यह सुविधा आठ जून, 2026 को परिचालन में आई और यह एफसीएनआर (बी) जमा के लिए 30 सितंबर, 2026 तक और ओएफसीबी तथा ईसीबी के लिए 31 दिसंबर, 2026 तक उपलब्ध है।
भाषा रमण अजय
अजय
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