बिल में सेवा शुल्क जोड़ने पर 41 रेस्तरां के खिलाफ सीसीपीए ने की कार्रवाई
योगेश
- 19 Jul 2026, 06:55 PM
- Updated: 06:55 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ग्राहकों के बिल में सेवा शुल्क जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।
प्राधिकरण ने कहा कि यह प्रथा उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आती है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया मंच पर कहा, "सेवा शुल्क पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसका भुगतान करना या नहीं करना पूरी तरह उपभोक्ता के विवेक पर निर्भर करता है। सीसीपीए ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया है।"
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने संबंधित रेस्तरां को बिल में स्वतः सेवा शुल्क जोड़ने की प्रथा तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं।
जोशी ने बताया कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई है।
पारित किए गए अंतिम आदेशों के तहत, सीसीपीए ने नियमों के उल्लंघन के लिए 'चायोस' (सनशाइन टीहाउस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है और प्रभावित ग्राहकों की राशि वापस करने का आदेश दिया है। कंपनी को अपने सभी आउटलेट पर सॉफ्टवेयर से तैयार होने वाली बिलिंग प्रणाली में बदलाव करने के लिए भी कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह शुल्क स्वचालित रूप से न जुड़े।
इसके अलावा सीसीपीए ने कैफे ब्लू बॉटल (पटना), चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, फिएस्टा बारबेक्यू नेशन (बारबेक्यू नेशन हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड), फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट (पेबल स्ट्रीट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड), एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड और जोरो - द लक्जरी नाइट क्लब (रुद्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड) के खिलाफ भी अंतिम आदेश पारित किए हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बयान में कहा कि जिन अन्य रेस्तरां के खिलाफ शिकायतें मिली हैं, उनके मामलों की भी जांच और कार्रवाई जारी है।
जांच के दौरान पता चला कि ग्राहकों के बिलों में उनकी सहमति लिए बिना सेवा शुल्क जोड़ा गया था।
सीसीपीए के अनुसार, यह वर्ष 2022 में जारी उसके दिशानिर्देशों का उल्लंघन है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाता है।
यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के मार्च, 2025 के उस फैसले के अनुरूप है, जिसमें सीसीपीए के दिशानिर्देशों को बरकरार रखते हुए कहा गया था कि अनिवार्य सेवा शुल्क वसूलने का कोई कानूनी आधार नहीं है और सभी रेस्तरां को इन नियमों का पालन करना होगा।
भाषा योगेश
योगेश
1907 1855 दिल्ली