वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस; दीपके ने अनशन शुरू किया
माधव
- 18 Jul 2026, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को चिकित्सकीय सलाह एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए उनके अनशन के 21वें दिन शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल ले गयी जिसके बाद विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने प्रदर्शनस्थल खाली करने की पुलिस की अपील को नजरअंदाज करते हुए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर अपना आंदोलन और तेज कर दिया। पुलिस कार्रवाई के कुछ ही समय बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग कर रहे कॉजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च निकाला जाएगा।
अस्पताल के प्राधिकारियों ने अपराह्न साढ़े तीन बजे जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा कि 59 वर्षीय वांगचुक ने शरीर में पानी की कमी और चयापचय संबंधी समस्याओं के बावजूद नसों के माध्यम से दिये जाने वाले तरल पदार्थ और किसी भी तरह की दवा लेने से इनकार कर दिया है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है और उन्हें उनके हित में उपचार लेने के लिए समझाया जा रहा है।
कॉजपा ने बाद में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल ''समाप्त नहीं की है'' और वह अस्पताल से इसे जारी रखेंगे।
संसद भवन से महज दो-तीन किलोमीटर दूर स्थित प्रदर्शन स्थल पर सुबह करीब सात बजे नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वहां पहुंचे, जिनमें से कई सादे कपड़ों में थे। अर्धसैनिक बलों के जवानों ने उस मंच के चारों ओर घेरा बना लिया, जहां बेहद कमजोर दिख रहे वांगचुक मौजूद थे।
पुलिसकर्मी सफेद चादरों की आड़ में वांगचुक के पास पहुंचे। इसी दौरान वहां अफरा-तफरी मच गई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने वांगचुक तक पहुंचने की कोशिश की तथा इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और उनके बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिसकर्मी वांगचुक को उठाकर एम्बुलेंस में ले गए।
पटना से शुक्रवार रात दिल्ली पहुंचे 22 वर्षीय तल्हा ने कहा, ''सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है।''
तल्हा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''लोग मंच की ओर दौड़ने लगे। हर कोई पुलिस को रोकने और वीडियो बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हमें केवल सफेद चादरें दिखाई दे रही थीं। हमारे वहां पहुंचने से पहले ही वे उन्हें ले जा चुके थे।''
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पुलिस सुबह वहां पहुंची तब प्रदर्शनकारियों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी। दीपके भी उस समय वहां मौजूद नहीं थे।
पुलिस उपायुक्त (नयी दिल्ली) सचिन शर्मा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए वांगचुक को ''आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल'' के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मची लेकिन पुलिसकर्मियों ने अत्यधिक संयम बरतते हुए कार्रवाई पूरी की।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन स्थल जल्द से जल्द खाली करने की अपील भी की।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे दोबारा एकत्र होने लगे। इस बीच दीपके मंच पर रो पड़े और उनके साथियों ने उन्हें संभाला।
कुछ घंटे बाद जब दीपके लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी एक महिला ने उन पर स्याही जैसा तरल पदार्थ फेंक दिया। पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया और उसकी पहचान पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बरखा त्रेहन के रूप में की।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दिल्ली पुलिस ने मुझे पीटा और हिरासत में लिया।''
दीपके ने कहा कि वह तरोताजा होने के लिए एक मित्र के घर गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें पीटा और कुछ समय तक हिरासत में रखा। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में देशभर में प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
कॉजपा ने 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया जिसमें नजर आ रहा है कि पुलिस वांगचुक को सफेद चादरों की आड़ में प्रदर्शन स्थल से ले गयी।
कॉजपा ने कहा, ''दिल्ली पुलिस भूख हड़ताल के 20 दिन बाद एक कमजोर बुजुर्ग को सफेद चादरों में ढककर अपने साथ ले गई। यह राष्ट्रीय शर्म की बात है।''
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्य नेहा, आमीन और मनीष ने हालांकि 21वें दिन भी प्रदर्शन स्थल पर अपनी भूख हड़ताल जारी रखी।
आइसा के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने तीनों के चारों ओर मानव शृंखला बनाकर पुलिस को उन्हें जबरन वहां से ले जाने से रोक दिया।
वांगचुक और आइसा के तीनों कार्यकर्ता नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कॉजपा के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अहिंसक भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई गलत है। उन्होंने सरकार पर ''असत्य और हिंसा'' का सहारा लेने का आरोप लगाया।
विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई की निंदा की और सरकार पर लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को कमजोर करने, असहमति की आवाज दबाने तथा बातचीत के बजाय बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नागरिकों से जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को वांगचुक से मुलाकात की थी।
गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना, शिक्षा का बढ़ता खर्च और छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं ''भारत के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे'' हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत के छात्रों और उन पर विश्वास करने एवं उनसे प्रेम करने वाले हम जैसे लोगों को इन मुद्दों को उठाने से कोई भी ताकत नहीं रोक सकती।''
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता शरद पवार, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की नेता एवं सांसद कनिमोई और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसे प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने 'एक्स' पर लिखा, ''कितने शर्म की बात है। पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को किस तरह बेशर्मी से बलपूर्वक कुचला जा रहा है।''
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ''लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने'' तथा जवाबदेही कमजोर करने की कोशिश है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि प्राधिकारियों ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने और वांगचुक के जीवन की रक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की। पार्टी ने इस मामले पर ''आक्रोश'' को लेकर सवाल उठाया।
दिल्ली पुलिस वांगचुक को सुबह सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची और उन्हें सात बजकर 40 मिनट पर भर्ती किया गया।
अस्पताल ने स्वास्थ्य बुलेटिन में कहा कि वह होश में थे और उनकी नाड़ी, रक्तचाप तथा रक्त में ऑक्सीजन का स्तर स्थिर था लेकिन उनके शरीर में पानी की कमी के संकेत मिले।
बयान में कहा गया, ''उन्हें नस के जरिये तरल पदार्थ देने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने नस के जरिये कोई भी तरल पदार्थ, मौखिक पुनर्जलीकरण घोल या अन्य दवा लेने से इनकार कर दिया। उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है और उन्हें उनके हित में उपचार लेने के लिए समझाया जा रहा है।''
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि चिकित्सक उनके परिवार को समझा रहे हैं कि वे इलाज शुरू करने की अनुमति दें।
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के कुछ समय बाद, उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल से अनुरोध किया कि उनकी सहमति के बिना कोई भी इलाज न किया जाये और उन्हें छुट्टी देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी चिकित्सा देखभाल में पारदर्शिता की कमी है।
चिकित्सकों ने शुक्रवार को बताया था कि भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से वांगचुक का वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है।
भाषा सिम्मी माधव
माधव
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