राष्ट्र और समाज की एक सदी की सेवा के बावजूद आरएसएस को गलत समझा गया : राजनाथ सिंह
माधव
- 17 Jul 2026, 09:40 PM
- Updated: 09:40 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पिछले 100 वर्षों से लगातार देश और समाज की सेवा कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी संगठन के बारे में या तो अनभिज्ञ है या भ्रामक जानकारी के आधार पर अपनी राय बना चुका है।
सिंह ने कहा कि ऐसा आरएसएस के बारे में गढ़े गए विमर्श के कारण हुआ है।
वाइस प्रेसिडेंट्स एन्क्लेव में पुस्तक 'आरएसएस ऐट 100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सेक्रीफाइस' के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित एक छोटे से स्वयंसेवी संगठन के रूप में शुरू हुआ आरएसएस आज दुनिया का सबसे बड़ा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर स्वयंसेवी संगठन बन चुका है।
उन्होंने कहा, ''आरएसएस पिछले 100 वर्षों से राष्ट्र और समाज की सेवा कर रहा है। फिर भी आज समाज का एक बड़ा वर्ग या तो इसके बारे में अनभिज्ञ है या भ्रामक जानकारी के आधार पर अपनी राय बना चुका है।''
राजनाथ सिंह ने अमेरिकी विद्वानों वॉल्टर एंडरसन और श्रीधर डी. दामले की पुस्तक 'द ब्रदरहुड इन सैफरन' का उल्लेख करते हुए कहा कि लेखकों ने लिखा है कि ''आरएसएस को समझना कठिन है और उसे गलत समझना आसान है।''
उन्होंने कहा, ''मेरे विचार से इसका एक प्रमुख कारण यह है कि आरएसएस पर निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ शैक्षणिक शोध अपेक्षाकृत कम हुआ है। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक उस कमी को काफी हद तक दूर करेगी।''
आरएसएस की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका न होने के आरोपों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस तरह का विमर्श वर्षों से फैलाया गया है। उन्होंने दावा किया कि संगठन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
सिंह ने कहा, ''जो लोग ऐसा मानते हैं, उन्हें इस पुस्तक का चौथा अध्याय पढ़ना चाहिए। उसमें बताया गया है कि आरएसएस के स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी। स्वयं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के समय आरएसएस के स्वयंसेवकों ने कई क्रांतिकारियों को अपने घरों में शरण दी थी।''
राजनाथ सिंह ने विभाजन के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय स्वयंसेवकों ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए कार्य किया था।
कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में आरएसएस के पंजीकृत संगठन न होने को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देना भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, ''हाल ही में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल उठाया कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन क्यों नहीं है। मेरी राय में ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना भी आवश्यक नहीं है।''
सिंह ने कहा, ''संविधान प्रत्येक नागरिक को संगठन बनाने का अधिकार देता है। एक मां के स्नेह को किसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती। एक शिक्षक के संस्कार किसी सरकारी मुहर पर निर्भर नहीं होते। गंगा को बहने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती और सूर्य को प्रकाश देने के लिए किसी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। उसी प्रकार, आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जिसे न किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता है और न ही किसी आधिकारिक मान्यता की।''
भाषा शफीक माधव
माधव
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