नगरपालिकाओं के मनोनीत सदस्य विधान परिषद चुनाव में मतदान के पात्र नहीं: उच्चतम न्यायालय
सुरेश
- 17 Jul 2026, 08:44 PM
- Updated: 08:44 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नगरपालिकाओं के मनोनीत सदस्यों को विधान परिषद चुनावों में मतदान का पात्र मानने से इनकार करते हुए 2021 के चुनावों में मतों की दोबारा गिनती के खिलाफ भाजपा के कर्नाटक विधान परिषद (केएलसी) सदस्य प्रणेश एम. के. की याचिका खारिज कर दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने बृहस्पतिवार को सुनाए गए एक आदेश में कहा कि कर्नाटक नगरपालिका अधिनियम (केएमए) के तहत चार नगर पंचायतों में नियुक्त 12 मनोनीत सदस्य मतदान के लिए अयोग्य हैं और विधान परिषद चुनावों के लिए तैयार मतदाता सूची में शामिल किए जाने के हकदार नहीं हैं।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, "हमारा मत है कि केएमए की धारा 352(1)(बी) के तहत मनोनीत किए गए सदस्यों को स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के लिए तैयार मतदाता सूची में शामिल किए जाने का अधिकार नहीं है और इसमें उन्हें शामिल किया जाना संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत है तथा कानून के तहत इसे कायम नहीं रखा जा सकता।"
चार नगर पंचायतों के 12 मनोनीत सदस्यों ने प्रणेश के पक्ष में मतदान किया था, जिसके बाद वह छह मतों के मामूली अंतर से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए थे।
पीठ ने कहा कि महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ऐसे लोग, जिन्हें संविधान के तहत नगरपालिका मामलों में मतदान की अनुमति नहीं है, विधान परिषद सदस्यों के चुनाव में मतदान कर सकते हैं।
पीठ ने कहा, ''हमारे विचार में इसका उत्तर निश्चित रूप से न होना चाहिए।''
पीठ ने कहा कि यदि संविधान के अनुच्छेद 171(3)(ए) की व्याख्या शाब्दिक रूप से की जाए और उसमें मनोनीत सदस्यों को शामिल किया जाए, तो इसका अनुचित परिणाम सामने आएगा।
पीठ ने कहा कि संविधान की व्याख्या इस तरह नहीं की जानी चाहिए, जिससे ऐसे विरोधाभास पैदा हों।
पीठ ने कहा कि अदालतों को प्रावधानों की व्याख्या संदर्भ के अनुसार करनी चाहिए।
कर्नाटक विधान परिषद के 12-चिक्कमगलुरु स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र (2021) के चुनावों की अधिसूचना 16 नवंबर 2021 को जारी की गई थी। मतदान 10 दिसंबर 2021 को हुआ और मतगणना 14 दिसंबर 2021 को की गई। कुल 2,410 मतों में से 2,371 मत वैध पाए गए।
प्रणेश को 1,188 मत मिले, जिसमें मनोनीत सदस्यों के मत भी शामिल थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार ए वी गायत्री को 1,182 मत मिले। इसके बाद प्रणेश को छह मतों के मामूली अंतर से निर्वाचित घोषित किया गया।
नतीजे घोषित होने के बाद मनोनीत सदस्यों को मतदाता सूची में शामिल करने और उनके मतदान के अधिकार को चुनौती दी गई।
मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जिसने 20 अप्रैल 2023 को कहा कि मनोनीत सदस्यों को विधान परिषद चुनावों में मतदान करने का अधिकार नहीं है।
प्रणेश ने उच्च न्यायालय के आदेशों को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
भाषा जोहेब सुरेश
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