वक्फ बोर्ड के रुख को लेकर माकपा का यूडीएफ सरकार पर हमला, अदालत के आदेश का भाजपा ने किया स्वागत
सुरेश
- 16 Jul 2026, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
तिरुवनंतपुरम, 16 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय के राज्य वक्फ बोर्ड को बड़े फैसले लेने से अंतरिम रूप से रोकने के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। विपक्षी माकपा ने कांग्रेस-नीत सरकार पर "अल्पसंख्यकों और केरल के धर्मनिरपेक्ष समाज के साथ विश्वासघात" करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इस आदेश को "न्याय की जीत" बताया।
केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य वक्फ बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना कोई भी बड़ा फैसला लेने से रोक दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम की धारा 14 पर उच्चतम न्यायालय ने रोक नहीं लगाई है। इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया केरल राज्य वक्फ बोर्ड का गठन कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं दिखता, क्योंकि इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश राज्य सरकार द्वारा यह कहे जाने के बाद आया कि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 की धारा 14 के प्रावधानों के अनुसार वक्फ बोर्ड का नए सिरे से गठन किया जाना आवश्यक है।
पार्टी राज्य सचिवालय ने एक बयान में आरोप लगाया कि इस मामले में सरकार का रुख भाजपा के "सांप्रदायिक एजेंडे" के अनुरूप है। पार्टी ने सवाल किया कि क्या संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने भाजपा के साथ किसी समझौते के तहत अपना रुख बदल लिया है।
पार्टी ने कहा, ''यूडीएफ सरकार ने उच्च न्यायालय में यह कहकर कि वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे के अनुरूप किया जा सकता है, अल्पसंख्यकों और केरल के धर्मनिरपेक्ष समाज के साथ गंभीर विश्वासघात किया है।''
माकपा ने दावा किया कि सरकार ने भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज की उस याचिका में उठाई गई मांग से सहमति जताई, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की मांग की गई थी।
पार्टी ने आरोप लगाया, "सत्ता संभालने के बाद से यूडीएफ सरकार ने जिन-जिन नीतिगत मुद्दों पर रुख अपनाया है, उनमें साफ तौर पर संघ परिवार का एजेंडा झलकता है।"
माकपा ने कहा कि वाम लोकतान्त्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की पिछली सरकार ने भाजपा-नीत केंद्र सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों के खिलाफ केरल विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था।
बयान में कहा गया, "सत्ता में आने के बाद यूडीएफ ने भाजपा समर्थक रुख क्यों अपना लिया? यह किस समझौते के तहत हुआ है? क्या इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) समेत यूडीएफ के सभी सहयोगी दल इस रुख से सहमत हैं?"
पार्टी ने उच्च न्यायालय की कार्यवाही का भी हवाला देते हुए दावा किया कि जब मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या सरकार भाजपा नेता की याचिका से सहमत है, तो महाधिवक्ता ने जवाब दिया कि सरकार उसका पूरी तरह समर्थन करती है।
भाषा तान्या सुरेश
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