कांग्रेस ने त्रिपुरा में जनगणना कार्य से सरकारी शिक्षकों को हटाने की मांग की
अविनाश
- 16 Jul 2026, 04:50 PM
- Updated: 04:50 PM
अगरतला, 16 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को मांग की कि त्रिपुरा में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य से अलग रखा जाए और उनकी जगह अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को लगाया जाए।
त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने मुख्यमंत्री माणिक साहा को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्य सरकार अक्सर शिक्षा में सुधार की बात तो करती है लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
उन्होंने कहा, ''वर्तमान में (नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार) शिक्षा विभाग की अलग-अलग शाखाओं में शिक्षकों के लगभग 18,000 पद खाली हैं जबकि 450 से अधिक सरकारी स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कर्मचारियों की कमी की वजह से शिक्षकों पर बढ़ता दबाव शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है।''
साहा ने कहा कि शिक्षकों का मुख्य ध्यान छात्रों को पढ़ाने पर होना चाहिए, लेकिन वे ''अक्सर सरकारी प्रशासनिक कामों में लगे रहते हैं''।
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ''नतीजतन, विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरी शिक्षा व्यवस्था को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।''
उन्होंने कहा, ''मौजूदा हालात को देखते हुए हम सरकारी शिक्षकों को जनगणना की प्रक्रिया से अलग रखने और इस अहम काम के लिए पढ़े-लिखे युवाओं में से अनुबंध पर कर्मचारियों को शामिल करने की अपनी मांग को दोहराते हैं।''
राज्य में जनगणना का पहला चरण - मकान सूचीकरण और गणना, एक से 30 अगस्त के बीच किया जाना है।
उन्होंने यह भी लिखा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) की जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है।
साहा ने उच्चतम न्यायालय के उस हालिया फैसले पर भी चिंता जताई जिसमें सेवा में मौजूद सरकारी शिक्षकों के लिए बीएड की डिग्री अनिवार्य कर दी गई है।
उन्होंने कहा, ''अगर इस फैसले को लागू किया जाता है तो राज्य में लगभग 10,000 सरकारी शिक्षक प्रभावित होंगे, जहां शिक्षकों की कमी पहले से ही गंभीर समस्या है। मेरा सुझाव है कि इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत की जाए।''
साहा ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गंभीर कमी को दूर करने के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाते हुए तुरंत शिक्षकों की भर्ती करने की भी मांग की।
भाषा सुरभि अविनाश
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