यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करे कांग्रेस : मुख्यमंत्री मोहन यादव
मनीषा
- 14 Jul 2026, 02:23 PM
- Updated: 02:23 PM
भोपाल, 14 जुलाई (भाषा) मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को कहा कि हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक के नजरिए से देखने वाली कांग्रेस को मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर चल रही कवायद पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी की जयंती पर विधानसभा परिसर में उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद संवाददाताओं से चर्चा में यादव ने कहा कि समिति ने यूसीसी पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, अब कांग्रेस को भी इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''चाहे यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, कांग्रेस हर विषय को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। सकारात्मक बात यह है कि सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर अपने विचार खुलकर और स्पष्ट रूप से रखे हैं, लेकिन कांग्रेस ने अब तक अपना स्पष्ट रुख सामने नहीं रखा है।''
यूसीसी को लेकर समिति की ओर से पिछले महीने भोपाल में आयोजित बैठक में कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया था जबकि भाजपा के प्रतिनिधियों ने इसमें शिरकत करते हुए पार्टी का पक्ष रखा था।
एक अधिकारी ने बताया कि समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार के विधि विभाग को सौंप दी गई है और विधेयक में आवश्यक संशोधन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए इसे भेजा जाएगा। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र बीस जुलाई से आरंभ होगा।
समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित कानूनों तथा परंपराओं का विश्लेषण कर सुझाव दिए गए हैं। इस खंड में 10 अध्याय शामिल हैं।
दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप दिया गया है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।
तीसरे खंड में जन-परामर्श रिपोर्ट है, जिसमें जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लैंगिक पहचान के हिसाब से अलग-अलग और समुदायवार विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया है।
समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है।
राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और सहजीवन (लिव-इन संबंध) जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विधेयक का प्रारूप तैयार करने का दायित्व सौंपा था।
समिति ने अपनी अनुशंसाएं तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठानों को अप्रभावित रखने, प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा संवैधानिक प्रावधानों और लोकनीति के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
भाषा ब्रजेन्द्र नरेश मनीषा
मनीषा
1407 1423 भोपाल