'ओडिसी' में बताए गए ओडिसियस के यात्रा मार्ग का पता लगाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा है?
नरेश
- 13 Jul 2026, 06:05 PM
- Updated: 06:05 PM
(प्रज्ञा अग्रवाल, लोबॉरो विश्वविद्यालय)
लोबॉरो, 13 जुलाई (द कन्वरसेशन) होमर का 'ओडिसी' एक प्राचीन यूनानी महाकाव्य है, जो ट्रोजन युद्ध के बाद राजा ओडिसियस के इथाका स्थित अपने घर लौटने के 10 साल लंबे साहसिक सफर पर प्रकाश डालता है। यह महाकाव्य अलग-अलग भौगोलिक, स्थानिक और कालखंड संबंधी पहलुओं को समेटे हुए है। लोग 'ओडिसी' में बताई गई जगहों के बारे में जानने के लिए सदियों से उत्सुक रहे हैं। उनके मन में यह सवाल भी उठता रहा है कि इसमें बताई गई कितनी जगहें असल में मौजूद थीं।
कुछ इतिहासकारों और शास्त्रीय विद्वानों का तर्क है कि 'ओडिसी' महज एक काव्य है। उनका दावा है कि कला और विशुद्ध पौराणिक कथा के रूप में इन जगहों को नक्शे पर तलाशने का कोई मतलब नहीं है।
सबसे पहले पृथ्वी की परिधि मापने वाले प्राचीन यूनानी विद्वान एराटोस्थनीज का मानना था कि 'ओडिसी' में ओडिसियस के जिन जगहों से गुजरने का जिक्र है, उनका कोई वास्तव में कोई भौगोलिक अस्तित्व नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था, "ओडिसियस की यात्राओं का दृश्य आपको तब मिलेगा, जब आप उस मोची को ढूंढ लेंगे, जिसने हवाओं का थैला सिला था।"
मैंने 'कार्टोग्राफी' (मानचित्र कला) और 'मेंटल मैपिंग' (मानसिक मानचित्रण) के इतिहास पर दो दशक से ज्यादा समय तक शोध किया है। मेरे लिए, इस महाकाव्य के भौगोलिक पहलू ही इसे असलियत से जोड़ते हैं। घर लौटने का ओडिसियस का सपना ही 'ओडिसी' की मुख्य बुनियाद है। और जैसे-जैसे ओडिसियस अलग-अलग जगहों और कालखंड से गुजरता है, उसमें बदलाव आता जाता है।
काल्पनिक कथा या हकीकत
-होमर के लगभग 600 साल बाद आए प्राचीन यूनानी इतिहासकार पॉलीबियस का मानना था कि 'ओडिसी' की कहानी पूरी तरह से काल्पनिक नहीं है। यह एक वास्तविक घटनाक्रम पर आधारित है, जिसमें कुछ पौराणिक कथाएं भी शामिल की गई थीं। पॉलीबियस का कहना था कि 'ओडिसी' में स्किला के पास बताए गए मछली पकड़ने के कुछ तरीके सिसिली के द्वीपों के आसपास अपनाए जाने वाले तरीकों से मिलते-जुलते हैं, ऐसे में स्किला संभवत: सिसिली के तट के आसपास मौजूद रहा होगा।
स्ट्रैबो एक यूनानी दार्शनिक और भूगोलवेत्ता थे, जिन्होंने होमर के लगभग 700 वर्ष बाद लेखन किया। उनकी 17 खंडों वाली 'जियोग्राफिका' सम्राट ऑगस्टस के दौर में यूनानी जीवन का खाका पेश करने वाला एक विस्तृत भूगोल-ग्रंथ और विश्वकोश है।
'जियोग्राफिका' में हिंद महासागर के ऐसे द्वीपों का भी जिक्र मिलता है, जहां केवल पुरुष या केवल महिलाएं रहती थीं, ठीक वैसे ही जैसे होमर ने 'ओडिसी' में बयां किया है। स्ट्रैबो ने लिखा है, "समुद्र में लिगर नदी के मुहाने के सामने एक छोटा-सा द्वीप है, जो तट से अधिक दूर नहीं है। उस द्वीप पर साम्निताए समुदाय की महिलाएं रहती हैं। वे शराब, उत्सव और प्रकृति के देवता 'डायोनिसस' की उपासक हैं और उन्हें खुश करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान करती हैं।"
उस समय की कई लोककथाओं और पौराणिक कथाओं में ऐसी महिलाओं का जिक्र मिलता है, जो पुरुषों को मोहपाश में फंसाकर उन्हें संकट में डाल देती थीं। होमर की 'सिर्सी' ऐसी ही एक महिला है, जिसका वर्णन उन्होंने "सुंदर बालों वाली भयानक देवी" के रूप में किया है।
सिर्सी 'ऐएआ' द्वीप पर अपने आज्ञाकारी भेड़ियों और शेरों के साथ अकेली रहती है। वह अपनी सुंदरता के बलबूते ओडिसियस और उसके साथियों को 'ऐएआ' द्वीप पर बुलाती है और फिर अपनी मायावी शक्तियों से उन्हें सूअर बना देती है।
होमर ने 'कैलिप्सो' के बारे में भी लिखा है जो ओडिसियस को अपने प्रेम और आकर्षण के बंधन में सात वर्षों तक 'ओजीजिया' द्वीप पर कैद करके रखती है। कहा जाता है कि ओडिसियस अपनी इच्छा से कैलिप्सो के साथ रहा और जब उसे लगा कि अब बहुत हो गया है, तब उसने वहां से निकलने का फैसला किया।
प्राचीन दुनिया के नक्शों में पौराणिक कथाएं और वास्तविक दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। रोमन गणितज्ञ और खगोलशास्त्री टॉलेमी ने लगभग 150 ईसा पूर्व में उस समय ज्ञात विश्व का नक्शा बनाया, जिसमें होमर की कथाओं में वर्णित कई जगहें भी शामिल थीं। इनमें 'लोटोफैगिटिस' यानी कमल खाने वाले लोगों की भूमि, 'सिर्केयम प्रोमोन्टोरियम' (जिसे 'ऐएआ' यानी सिर्सी के साम्राज्य के रूप में जाना जाता था) और सिरेनुसाए इंसुलाए यानी सायरन का द्वीप (जहां समुद्री अप्सराएं रहती थीं, जो अपने मनमोहक गीतों से नाविकों को उनकी मौत की ओर खींचती थीं) प्रमुख थे।
हालांकि, इन जगहों को आधुनिक नक्शों पर सटीक तौर पर इंगित करने की कोशिशें काफी मुश्किल साबित हुई हैं। इसका कारण यह है कि अक्षांश और देशांतर को लेकर टॉलेमी की गणना पृथ्वी की परिधि और उसके आकार की उस समय की समझ पर आधारित थीं, जो आज की वैज्ञानिक जानकारी से बहुत अलग थी।
फिर भी जब टॉलेमी के नक्शों का अनुमानित मिलान आधुनिक मानचित्रों से किया जाता है, तो यह संकेत मिलता है कि 'लोटोफैगिटिस' संभवतः अफ्रीका में स्थित रहा होगा।
डच मानचित्रकार अब्राहम ऑर्टेलियस ने 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'थिएट्रम ऑर्बिस टेरारम' में पहली बार ओडिसियस की पूरी यात्रा का हर पड़ाव इंगित किया। यह नक्शा 'यूलिसीस की यात्राओं का मानचित्र' नाम से जाना गया। यूलिसीस ओडिसियस का लातिन नाम है।
ऑर्टेलियस ने ओडिसियस की पौराणिक और काल्पनिक दुनिया को वैज्ञानिक तथ्यों की तरह अपने नक्शे में दर्शाया। उन्होंने दावा किया कि इथाका वास्तव में आज का कोर्फू है।
होमर ने कैलिप्सो द्वीप को स्केरिया के तट के पास बताया था। स्केरिया वह पौराणिक और सुरक्षित स्थान था, जहां ओडिसियस अपने घर इथाका लौटने से पहले अंतिम बार ठहरा था।
चूंकि, कोर्फू के पश्चिम में वास्तव में कोई द्वीप नहीं था, इसलिए ऑर्टेलियस ने अपने नक्शे में एक काल्पनिक द्वीप बना दिया। बाद के मानचित्रकारों ने भी उसी नक्शे को आधार बनाया। परिणामस्वरूप, यह काल्पनिक द्वीप 19वीं और 20वीं शताब्दी तक बनाए गए कई नक्शों में लगातार दिखाई देता रहा।
फ्रांसीसी राजनीतिज्ञ एवं पुरातात्विक यात्री विक्टर बेरार्ड ने 1912 में ओडिसियस के यात्रा मार्ग को फिर से खोजने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने खुद उसी मार्ग पर यात्रा की, जिससे ओडिसियस के गुजरने का वर्णन मिलता है।
बेरार्ड ने कैलिप्सो द्वीप को जिब्राल्टर के पास स्थित दिखाया, जबकि कमल खाने वालों की भूमि 'लोटोफैगिटिस' को दक्षिणी ट्यूनीशिया के तट के पास मौजूद जेरबा द्वीप बताया। उन्होंने साइक्लोप्स की भूमि को इटली के नेपल्स शहर के पोसिलिपो क्षेत्र में स्थित दिखाया।
बेरार्ड का कहना था कि होमर का 'ओडिसी' फोनीशियन की यात्राओं और उनके नक्शों से प्रभावित था। ये नक्शे वास्तव में तटीय नौकायन निर्देश थे, जिनमें रास्ता पहचानने के लिए तारों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, इनमें से कई नक्शे वास्तविक रूप में मौजूद नहीं थे, बल्कि लोगों की कल्पनाओं और कहानियों में ही जीवित रहे।
इथाका की तलाश
-ओडिसी में वर्णित यात्रा मार्ग को समझने की कोशिश में बहस मुख्यत: इस बात पर केंद्रित रही कि इथाका वास्तव में कहां स्थित था।
लंबे समय से विद्वानों का मानना रहा है कि इथाका वास्तव में आयोनियन सागर में स्थित इथाकी द्वीप ही है। लेकिन समस्या यह है कि इथाकी एक पहाड़ी द्वीप है, जबकि होमर के 'ओडिसी' में वर्णित इथाका को 'मैदानी भूमि' बताया गया है।
कैंब्रिज और एबरडीन के शोधकर्ताओं ने हाल में कहा कि होमर के 'ओडिसी' में इथाका को कभी भी एक द्वीप के रूप में नहीं बताया गया था। उन्होंने कहा कि होमर ने इथाका को किसी बड़े द्वीप का हिस्सा यानी एक भूभाग या देश के रूप में वर्णित किया था।
इससे संकेत मिलता है कि केफालोनिया के पश्चिमी तट पर स्थित पालिकी वह स्थान हो सकता है, जहां इथाका स्थित था। भू-विज्ञान से जुड़ी पड़तालों और पुरातात्विक खुदाइयों से पता चला है कि पालिकी कांस्य युग का एक महत्वपूर्ण स्थान था, इसलिए इसे इथाका के संभावित स्थान के रूप में माना जा सकता है।
ओडिसियस की यात्रा में बताए गए स्थान या तो वास्तविक दुनिया के स्थानों से मेल खाते हो सकते हैं, या फिर वे पूरी तरह से काल्पनिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित भी हो सकते हैं। लेकिन चाहे वे वास्तविक हों या काल्पनिक, इन स्थानों का आपसी संबंध हमें घर लौटने की प्रबल इच्छा और अपनेपन की गहन तलाश की एक कहानी सुनाता है। यह दिखाता है कि प्राचीन लेखक हमारी दुनिया को रहस्यों और खतरों से भरी जगह के रूप में देखते थे।
'ओडिसी' में वर्णित यात्रा मार्ग हमें प्राचीन यूनानी दुनिया के लोगों की कमजोरियों और डर को समझने का एक जरिया भी प्रदान करता है।
ओडिसियस की यात्रा बयां करने वाले नक्शे भले ही वास्तविक न हों। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि नक्शे केवल एक कहानी हैं, जो हम खुद को सुनाते हैं। ये एक ऐसी यात्रा की ओर ले जाते हैं, जो हमारी कल्पना की सीमाओं से बहुत आगे है।
(द कन्वरसेशन) पारुल नरेश
नरेश
1307 1805 लोबॉरो