मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए एआई आधारित 'डस्ट पोर्टल 2.0' शुरू किया
वैभव
- 13 Jul 2026, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) का कृत्रिम बुद्धमित्ता (एआई) तकनीक से लैस 'डस्ट पोर्टल 2.0' और ऐप सोमवार को शुरू किया।
इस डिजिटल मंच का उद्देश्य वास्तविक समय की निगरानी और स्वचालित अलर्ट के माध्यम से निर्माण से संबंधित धूल प्रदूषण की निगरानी को मजबूत करना है।
एक बयान के मुताबिक, 'डस्ट पोर्टल 2.0' में भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित मानचित्रण, 360 डिग्री घूमने वाले (पीटीजेड) लाइव कैमरे, पीएम-10 और पीएम-2.5 कण मापक सेंसर, वास्तविक समय विश्लेषण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है।
इसमें कहा गया है कि यह पोर्टल 500 गज़ या इससे अधिक के निर्माण स्थलों का सटीक मानचित्रण करेगा और धूल नियंत्रण से जुड़े पांच प्रमुख मानकों का स्वतः आकलन करेगा, जिससे निगरानी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप होगी।
साथ ही, यह निर्माण स्थलों के निकटतम वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (एक्यूएमएस) की पहचान कर स्थल-स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही प्रणाली स्वतः पीले, नारंगी और लाल रंग की चेतावनी जारी करेगी, ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
पोर्टल की शुरुआत करते हुए गुप्ता ने कहा कि उन्नत पोर्टल में पारंपरिक निगरानी की जगह एआई-आधारित प्रणाली का उपयोग किया गया है और इससे निर्माण स्थलों से धूल प्रदूषण को लेकर वास्तविक समय में अलर्ट मिलेगा। इसके माध्यम से परियोजना संचालकों को स्व-मूल्यांकन की सुविधा मिलेगी और डेटा आधारित निगरानी और प्रवर्तन को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सख्त नियमों से नहीं, बल्कि आधुनिक और स्मार्ट प्रशासनिक प्रणालियों से भी लड़ी जाएगी और 'डस्ट पोर्टल 2.0' निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा।
उन्होंने कहा, "एआई और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारी सरकार अनुपालन प्रक्रिया को सरल, निगरानी को अधिक प्रभावी और प्रवर्तन को अधिक पारदर्शी बना रही है। यह मंच सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक निर्माण एजेंसी स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त दिल्ली के निर्माण में सक्रिय भागीदार बने। भविष्य में चालान प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है ताकि पोर्टल के माध्यम से सीधे नोटिस और चालान जारी किए जा सकें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या असुविधा की संभावना समाप्त हो सके"
उन्होंने कहा, "अब तक, हर चीज की निगरानी पारंपरिक रूप से की जा रही थी। एआई-आधारित धूल शमन पोर्टल के साथ, निर्माण स्थलों पर स्थापित 360-डिग्री कैमरे और सेंसर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को वास्तविक समय में अलर्ट भेजेंगे। यह पोर्टल अनुपालन, निगरानी और प्रवर्तन में सुधार करके तकनीक आधारित, प्रभावी प्रशासन को सक्षम करेगा।"
मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1,800 निर्माण स्थल हैं, जिनमें से 800 से 900 वर्तमान में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 800 स्थल पहले ही पोर्टल से जुड़े 360-डिग्री कैमरों से लैस हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में बताया कि दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। ग्रीष्म ऋतु में कुल वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत और शीत ऋतु में 15 प्रतिशत तक रहती है। वहीं, पीएम-10 उत्सर्जन में धूल की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और पीएम-2.5 उत्सर्जन में लगभग 38 प्रतिशत है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 'डस्ट पोर्टल 2.0' विकसित किया गया है।
इसमें कहा गया है कि डस्ट पोर्टल 2.0 के जरिए दिल्ली में पंजीकृत सभी निर्माण स्थलों की एक ही मंच से निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल पर चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, सेंसर से मिलने वाला डेटा और नियमों के पालन से जुड़ी सभी सूचनाएं उपलब्ध होंगी।
दिल्ली सचिवालय में पोर्टल शुरू करने के दौरान मौजूद पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पोर्टल अधिकारियों को शहर भर में निर्माण गतिविधियों की निगरानी करने और धूल प्रदूषण के खिलाफ प्रवर्तन में सुधार करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि नई एआई आधारित व्यवस्था से नियमों के पालन की वास्तविक समय में निगरानी होगी, उल्लंघन होने पर तत्काल अलर्ट जारी होंगे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाषा नोमान नोमान वैभव
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