कॉजपा के प्रदर्शन का 24वां दिन : भूख हड़ताल के 16वें दिन वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम घटा
वैभव
- 13 Jul 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) यहां जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम घट गया तथा उनकी रक्त शर्करा का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसी लीटर) पहुंच गया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) ने यह जानकारी दी।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यह कहते हुए केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की कि 'लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं।'
वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का आज 16वां दिन है तथा उनकी सेहत और बिगड़ गई है।
कॉजपा की ओर से जारी स्वास्थ्य सूचना के मुताबिक, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का कुल वज़न 8.2 किलोग्राम कम हो गया है, उनकी रक्त शर्करा का स्तर गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया है और उनका रक्तचाप 107/70 एमएमएचजी दर्ज किया गया।।
परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर यहां जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) का विरोध-प्रदर्शन सोमवार को 24वें दिन जारी रहा।
आज आइसा कार्यकर्ता दीपक को सेहत बिगड़ने पर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया। वह 16 दिनों से भूख हड़ताल पर है।
आइसा ने एक बयान में कहा कि दीपक का वज़न लगभग 15 प्रतिशत कम हो गया है और पिछले तीन दिन में उसका रक्तचाप गिरकर 80/40 एमएमएचजी हो गया है, जिसके कारण डॉक्टरों ने अंगों को नुकसान पहुंचने के जोखिम को देखते हुए उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है। हालांकि, संगठन ने कहा कि उसके सदस्य नेहा, मनीष और आमीन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगे।
दीपके ने प्रेसवार्ता में सवाल उठाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की बिगड़ती सेहत के बावजूद सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत क्यों शुरू नहीं की।
उन्होंने कहा, ''मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं।''
उन्होंने कहा, ''अपनी गलती मानना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह परिपक्वता, जवाबदेही और अपनी गलती सुधारने की इच्छा का संकेत है। हम बस जवाबदेही चाहते हैं।''
दीपके ने आरोप लगाया कि वांगचुक की बिगड़ती हालत के बावजूद, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोई पहल नहीं की।
उन्होंने कहा, ''यह कैसी सरकार है? सोनम वांगचुक इसी देश के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने काम से भारत को दुनिया भर में पहचान दिलाई है। आज वह देश के विद्यार्थियों के लिए लड़ रहे हैं, फिर भी सरकार ने उनसे बात करने के लिए किसी मंत्री या प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा है। सरकार की यह पूरी तरह से बेरुखी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।''
दीपके ने कहा कि प्रदर्शनकारी सरकार की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार हालात को बिगड़ने देने के बजाय बातचीत शुरू करेगी।
वांगचुक का अनशन आज 16वें दिन भी जारी रहा। ऐसे में 2011 में 'जन लोकपाल' के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के 12 दिन के अनशन से भी इसकी तुलना की गई।
हज़ारे ने सबसे पहले पांच अप्रैल 2011 को भूख हड़ताल शुरू की थी और चार दिन बाद इसे खत्म कर दिया था, जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई थी। अगस्त 2011 में, हज़ारे ने एक बार फिर भूख हड़ताल शुरू की, जो 12 दिनों तक चली।
जब पूछा गया कि वांगचुक और अन्य लोग अब भी उपवास क्यों कर रहे हैं, जबकि हज़ारे की 2011 की भूख हड़ताल 12 दिनों के बाद खत्म हो गई थी, तो दीपके ने कहा, ''वह एक अलग भारत था... आज के भारत में इंसानी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है।''
उन्होंने मैग्सायसाय से सम्मानित और जाने-माने शिक्षाविद वांगचुक की सेहत की परवाह न करने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की।
दीपके ने कहा, ''अगर उन्हें उनकी ज़िंदगी की कोई परवाह नहीं है, तो हम कौन हैं... हम तो कॉकरोच हैं।''
उन्होंने कहा कि उन लोगों ने वांगचुक से कई बार अपना अनशन खत्म करने की अपील की थी, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता ने तब तक पीछे हटने से इनकार कर दिया है जब तक सरकार उनकी मांगें मान नहीं लेती।
दीपके ने यह भी कहा कि संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च में कई विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
कॉजपा प्रवक्ता विजेता दहिया ने कहा कि जब सरकार बार-बार होने वाली परीक्षा की गड़बड़ियों से प्रभावित विद्यार्थियों को नज़रअंदाज़ कर रही है, तो वांगचुक से भूख हड़ताल वापस लेने के लिए कहना नामुमकिन है।
उन्होंने देश भर के लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने की अपील की और कहा कि केवल बड़े पैमाने पर लोगों के एकजुट होने से ही सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए मजबूर होगी।
संगठन ने मार्च के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से एक 'मिस्ड-कॉल कैंपेन' की भी घोषणा की और लोगों से अपने 'मैं सोनम का समर्थन करता हूं' सोशल मीडिया अभियान में हिस्सा लेने का आग्रह किया।
इससे पहले दिन में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई।
माकपा सांसद अमरा राम ने आंध्र प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ प्रदर्शन स्थल का दौरा किया तथा मांगों का समर्थन किया। इन नेताओं ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च का भी समर्थन किया।
कॉजपा के अनुसार आप प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन के लिए अपना समर्थन दोहराया तथा एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली की मांग की। उसने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया।
कॉकरोच जनता पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग कर रही है।
कॉजपा का विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था, जबकि वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
भाषा राजकुमार वैभव
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