धीरज और कीर्ति तीरंदाजी विश्व कप में कांस्य पदक से चूके, भारत का अभियान दो पदक के साथ खत्म
नमिता
- 12 Jul 2026, 09:51 PM
- Updated: 09:51 PM
मैड्रिड, 12 जुलाई (भाषा) धीरज बोम्मादेवरा और कीर्ति शर्मा की भारतीय रिकर्व मिश्रित जोड़ी 3-1 से बढ़त का फायदा नहीं उठा पाई और रविवार को यहां तीरंदाजी विश्व कप के चौथे चरण में इटली से 3-5 से हारकर कांस्य पदक से चूक गई।
अंताल्या विश्व कप चैंपियन धीरज के लिए यह विश्व कप निराशाजनक रहा। उन्होंने पिछले महीने तीसरे चरण में कुमकुम मोहद के साथ रिकर्व मिश्रित टीम का स्वर्ण पदक जीता था लेकिन मैड्रिड से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ेगा।
भारत का व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी अभियान निराशाजनक रहा। रिकर्व वर्ग में कीर्ति सेमीफाइनल और कांस्य पदक के मुकाबले दोनों में हार गईं, जिससे भारतीय रिकर्व तीरंदाज बिना किसी पदक के लौटे। इसके साथ ही भारत ने प्रतियोगिता में अपना अभियान कुल दो पदकों (एक रजत और एक कांस्य)के साथ समाप्त किया।
यह दोनों ही पदक उसने शनिवार को कंपाउंड वर्ग में जीते थे। महिला टीम ने कांस्य पदक जीता, जबकि प्रथिका प्रदीप ने रजत पदक हासिल किया।
महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में कीर्ति भारत की एकमात्र चुनौती थीं। पिछले महीने अंताल्या में विश्व कप में पदार्पण करने वाली 19 वर्षीय कीर्ति के पास इस प्रतियोगिता में अपना पहला पदक जीतने का अवसर था, लेकिन उन्हें सेमीफाइनल में तुर्किये की एलिफ गोक्किर के खिलाफ 3-7 (28-28, 26-28, 26-28, 29-28, 27-28) से हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद कांस्य पदक के मुकाबले में कीर्ति का सामना कोरिया की ओह येजिन से हुआ, जहां वह 1-7 (27-29, 28-30, 29-29, 28-30) से पराजित हो गईं। इसके साथ ही भारत रिकर्व वर्ग में बिना किसी पदक के अपना अभियान समाप्त करने को मजबूर हुआ।
पहली बार जोड़ी बनाकर खेल रहे धीरज और कीर्ति ने पहला सेट 38-38 से बराबर किया। उन्होंने दूसरे सेट में भी अपनी निरंतरता बनाए रखी और केवल दो अंक गंवाकर 38 का स्कोर बनाया, जबकि रोबर्टा डि फ्रांसेस्को और माटेओ बोरसानी की इटली की जोड़ी ने 37 अंक बनाए, जिससे भारतीय जोड़ी को 3-1 की बढ़त मिल गई।
इटली की जोड़ी ने तीसरा सेट 39-37 से जीता और मुकाबले को 3-3 से बराबर कर दिया। चौथे और निर्णायक सेट में भी भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई जबकि इटली की टीम ने चार 'परफेक्ट 10' बनाकर 40-37 से जीत हासिल करके कांस्य पदक अपने नाम कर दिया।
भाषा पंत
आनन्द नमिता
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