चन्नी गुट ने बघेल से मुलाकात की, पंजाब कांग्रेस प्रमुख वडिंग को बदलने की मांग की
शोभना
- 11 Jul 2026, 10:49 PM
- Updated: 10:49 PM
चंडीगढ़, 11 जुलाई (भाषा) पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही उथल-पुथल खत्म होती नहीं दिख रही है। शनिवार को कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बदलने की मांग की, जबकि राज्य के प्रभारी पार्टी महासचिव भूपेश बघेल ने दावा किया कि मौजूदा अध्यक्ष को एक और कार्यकाल देने के पार्टी आलाकमान के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
राज्य में हालात संभालने के मकसद से सोमवार को बघेल के आने के बाद से कई दिनों तक दूरी बनाए रखने के बाद, जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और उनके करीबी नेताओं ने पार्टी विधायक राणा गुरजीत के सेक्टर-4 स्थित घर पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
कांग्रेस ने एक जुलाई को घोषणा की थी कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे और जालंधर से सांसद चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से ''नाराज'' बताए जा रहे चन्नी ने अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की थी। बघेल सोमवार को पंजाब पहुंचे थे और इसके बाद उन्होंने राज्य के कई नेताओं एवं पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं। चन्नी के करीबी कई नेता भी इन बैठकों से दूर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को करीब 80 मिनट तक चली बैठक में बागी गुट ने अपनी ताकत दिखाई- जिसमें कम से कम 12 विधायकों समेत 80 से ज्यादा नेता शामिल हुए- और बघेल के सामने यह बात रखी कि वे राज्य इकाई के प्रमुख के तौर पर वडिंग को बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं।
खास बात यह है कि राज्य इकाई में आपसी कलह और तेज़ होती दिख रही है, क्योंकि कई नेता वडिंग को हटाने की मांग कर रहे हैं।
बिना किसी का नाम लिए, वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उन्हें ऐसा नेता चाहिए जो "समझौता न करने वाला" हो।
बघेल ने हालांकि दावा किया कि राज्य इकाई में किसी को भी राज्य प्रमुख के बारे में पार्टी आलाकमान के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है।
दिल्ली पहुंचने पर बघेल ने 'पीटीआई वीडियो' को बताया, "सबकुछ ठीक है। (पंजाब कांग्रेस में) सब अच्छा है।"
बाद में 'एक्स' पर एक पोस्ट में चन्नी ने कहा, "पंजाब के लिए एकजुट। हमने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल जी को 11 जुलाई को आमंत्रित किया है, ताकि उनके सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पंजाब के लोगों की भावनाएं रखी जा सकें।"
बघेल ने कहा कि कुछ साथियों ने अपनी चिंताएं बताई हैं, जिन्हें वे पार्टी आलाकमान तक पहुंचाएंगे।
कांग्रेस नेता ने इसे बैठक कहने के बजाय यह कहा कि 2027 के चुनावों से पहले अपने दौरे के दौरान वे कई नेताओं से उनके घरों पर भी मिले थे और राणा के बुलावे पर उनके घर गए थे।
बघेल ने कहा, "मैंने सभी साथियों से बात की और उन्होंने मेरे साथ अपनी राय साझा की। पार्टी आलाकमान के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, वे सभी आलाकमान के साथ हैं।"
उन्होंने कहा, "सभी एकजुट हैं। हमारे साथियों ने कुछ मुद्दे उठाए थे और प्रभारी महासचिव के तौर पर मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं सभी के हितों की रक्षा करूंगा और ध्यान रखूंगा।"
उन्होंने विस्तार से जानकारी न देते हुए कहा, "दूसरी बात, कुछ सहयोगियों ने कुछ चिंताएं जताई हैं, जिन्हें मैं आलाकमान तक पहुंचाऊंगा।"
बघेल ने उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि अगर कोई उम्मीदवार जीतने की क्षमता रखता है, तो उसे निश्चित रूप से टिकट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी को भी सिर्फ़ इसलिए कमजोर महसूस नहीं होना चाहिए कि उनके पास किसी बड़े नेता का समर्थन नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वडिंग को बदलने की मांग की गई थी, बघेल ने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं हुई"।
चन्नी और उनके करीबी नेता इसमें शामिल हुए, लेकिन वडिंग इसका हिस्सा नहीं थे।
बैठक के तुरंत बाद बघेल रायपुर के लिए रवाना हो गए। हवाई अड्डे जाते समय वडिंग भी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के साथ थे और उन्होंने स्वयं कार चलाई।
शनिवार की बैठक के कुछ ही समय बाद, वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पत्रकारों को बताया कि कार्यकर्ताओं की भावनाएं पहुंचा दी गई हैं और यह भी कहा गया कि पार्टी में कभी-कभी फैसले वापस लेने पड़ते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि चन्नी खेमे को वडिंग मंजूर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के शासन में हालात ऐसे हैं कि भ्रष्टाचार फैला हुआ है और कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है; सिर्फ एकजुट कांग्रेस ही भगवंत मान सरकार का मुकाबला कर सकती है और इसके लिए उन्हें ऐसे नेता की जरूरत है, जो सरकार का सामना कर सके और निडरता व मजबूती से अपनी बात रख सके।
रंधावा ने किसी का नाम लिये बिना पंजाबी में कहा, "सानू ठोक के बोलने वाला लीडर चाहिए, सानू कंप्रोमाइज्ड लीडर की नहीं जरूरत।" (हमें पुरजोर तरीके से अपनी बात कहने वाला नेता चाहिए, समझौता करने वाले नेता की जरूरत नहीं है)।
चन्नी वरिष्ठ नेताओं रंधावा, भारत भूषण आशु और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा व अन्य के साथ गुरजीत के आवास पर पहुंचे।
बैठक में विपक्ष के नेता और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा - जिन्हें गुरजीत सिंह ने आमंत्रित किया था - और पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ.पी. सिंह भी मौजूद थे।
रंधावा की "समझौता करने वाले नेता" वाली टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए वडिंग ने पत्रकारों से कहा, "कौन समझौता करने वाला है? क्या रंधावा जी ने किसी का नाम लिया है? अगर नहीं, तो आप लोग मेरी ओर इशारा क्यों कर रहे हैं?"
जब बाजवा से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें यह पता लगाना होगा कि रंधावा ने किस संदर्भ में और किसके बारे में यह टिप्पणी की।
हालांकि, बाजवा ने कहा कि आम पंजाबी कांग्रेस की सरकार देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि "छोटी-मोटी परेशानियां या कुछ गलतफहमियां" हों उन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, बघेल ने इसका भरोसा दिलाया है।
बाजवा ने कहा कि हर कोई कांग्रेस और उसकी विचारधारा के साथ है और सभी चाहते हैं कि पार्टी सत्ता में वापसी करे।
साथ ही, वडिंग ने कहा कि रंधावा और वह पिछले लगभग पांच वर्षों से साथ काम कर रहे हैं और अगर उनमें से कोई भी समझौता करता या गलत रास्ते पर होता, तो वे इतने लंबे समय तक साथ नहीं रह पाते।
वडिंग ने कहा, "लेकिन रंधावा की यह बात सही है कि हमारी पार्टी में कोई 'स्लीपर सेल' या समझौता करने वाला नेता नहीं होना चाहिए। कई नेताओं पर भाजपा नेताओं, उत्तर प्रदेश के कुछ नेताओं और कभी-कभी आम आदमी पार्टी के नेताओं से भी मिलने के आरोप लगते रहे हैं। पंजाब को ऐसे नेताओं और 'स्लीपर सेल' की जरूरत नहीं है, जो समझौता कर लेते हों।"
बाद में, यहां हवाईअड्डे के बाहर एक और छोटी सी बातचीत में बघेल ने कहा, "हां, मैं मानता हूं कि अगर कोई नेता समझौता कर लेता है, तो काम नहीं चलेगा। अगर कोई नेता भाजपा, 'आप' या किसी और के साथ समझौता कर लेता है, तो बात नहीं बनेगी। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।"
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने को लेकर कोई बात नहीं हुई।
उन्होंने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं हुई। हम बस यही चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनाए।"
बैठक में उनके शामिल न होने के बारे में पूछे जाने पर वडिंग ने कहा, "पार्टी के प्रभारी महासचिव सभी से मिलते हैं। यह जरूरी नहीं है कि सभी बैठकें प्रदेश इकाई के अध्यक्ष की मौजूदगी में ही हों।"
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पंजाब कांग्रेस में जल्द ही एकता देखने को मिलेगी, तो वडिंग ने मजाकिया अंदाज में कहा, "यह बैठक इसी बारे में है।" शुरू में हिचकिचाहट के बावजूद, चन्नी और उनके करीबी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को आखिरकार कई दिनों से चल रही अनिश्चितता को खत्म करने और बघेल से मिलकर उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं की "भावनाओं" से अवगत कराने का फैसला किया।
पंजाब में कांग्रेस के कई मौजूदा विधायक, कुछ सांसद, पूर्व सांसद एवं विधायक तथा विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के नेता सुबह राणा गुरजीत के आवास पर पहुंचे।
बघेल पहले ही राज्य पार्टी नेतृत्व में किसी भी बदलाव की संभावना को खारिज कर चुके हैं। भाषा प्रशांत शोभना
शोभना
1107 2249 चंडीगढ़