पश्चिम बंगाल सरकार कामदुनी प्रकरण की पीड़िता के परिवार का शीर्ष अदालत में विरोध नहीं करेगी: शुभेंदु
माधव
- 11 Jul 2026, 06:28 PM
- Updated: 06:28 PM
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 11 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार शीर्ष अदालत में न्याय की लड़ाई लड़ रहे कामदुनी बलात्कार एवं हत्याकांड की पीड़िता के परिवार का 'विरोध' कर रही थी लेकिन अब उनकी सरकार पीड़ित परिवार को कानूनी मदद देकर उसकी सहायता करेगा।
उन्होंने 2013 के इस प्रकरण के संबंध में पत्रकारों से कहा, ''राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में उनका विरोध नहीं करेगी। हम पीड़ित परिवार को सरकारी वकील उपलब्ध कराकर उनकी मदद करेंगे। मैं इस मामले में हमारे स्थायी वकील के पास अपना संदेश भिजवाऊंगा ।''
इससे पहले उन्होंने बारुईपुर में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गयी किशोरी के परिवार और इस घटना के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारे डाले गये गये व्यक्ति के परिवार से मुलाकात की।
वर्ष 2013 में उत्तरी 24 परगना के कामदुनी में घर लौट रही एक कॉलेज छात्रा को घसीटकर खेत में ले जाया गया था, उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गयी थी। अगली सुबह उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली थी। इस घटना से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच राज्य में भारी आक्रोश पैदा हुआ था।
तीन साल बाद, एक सत्र अदालत ने इस मामले में तीन दोषियों को मौत की सजा और तीन अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दो दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया था और मृत्युदंड वाले तीसरे दोषी को बरी कर दिया था । उच्च न्यायालय ने तीन अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा भी कम कर दी थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''कलकत्ता उच्च न्यायालय में सोलह सरकारी वकील बदले गए। इसके बाद पीड़ित परिवार शीर्ष अदालत पहुंचा। हम उच्चतम न्यायालय में सरकारी वकील उपलब्ध कराकर उनकी मदद करेंगे।''
उन्होंने कहा, ''कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बारासात अदालत के फैसले को रद्द कर दिया, जिसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा। अब तक राज्य सरकार पीड़ित परिवार का विरोध कर रही थी। लेकिन अब उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार उनका विरोध नहीं करेगी। मैं अपने स्थायी वकील तक अपना संदेश पहुंचाऊंगा।''
कामदुनी मामले की पीड़िता के परिवार ने उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था और आरोप लगाया था कि उसे न्याय नहीं मिला। उसने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार अदालतों के सामने अहम तथ्य पेश करने में नाकाम रही और पुलिस ने अपराध की ठीक से जांच नहीं की।
मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी पर उनके कथित बयान को लेकर निशाना साधते हुए कहा, '' निश्चिंत रहें, पश्चिम बंगाल सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। वह ऐसी घटनाओं को इक्का-दुक्का घटना या प्रेम-प्रसंग नहीं बताएगी, न ही यह कहेगी कि पीड़िता गर्भवती थी, और न ही न्याय के बदले 10 लाख रुपये का मुआवज़ा देगी।''
कामदुनी घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उस जगह का दौरा किया और उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों में माओवादी भी शामिल थे, जिस की तीखी आलोचना हुई थी।
भाषा राजकुमार माधव
माधव
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