बाघों की मौत : मप्र उच्च न्यायालय ने सभी बाघ अभयारण्यों की स्थिति रिपोर्ट मांगी
रंजन
- 10 Jul 2026, 01:15 PM
- Updated: 01:15 PM
जबलपुर, 10 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में हाल में हुई बाघों की मौत के मद्देनजर प्रदेश के सभी नौ बाघ अभयारण्यों की स्थिति रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने कान्हा बाघ अभयारण्य (केटीआर) में बाघों के बीच संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी पी शर्मा की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।
यह याचिका केटीआर में हाल में आठ बाघों की मौत के मामले को लेकर दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि केटीआर के आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों में सीडीवी के संक्रमण को देखते हुये के 2000 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है।
हालांकि, अदालत ने संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावी और त्रुटिरहित रणनीति अपनाने पर जोर दिया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को केटीआर से संबंधित उच्चतम न्यायालय के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा। साथ ही कान्हा ही नहीं बल्कि राज्य के सभी बाघ अभयारण्यों में कुत्तों के टीकाकरण तथा संक्रमण रोकने के उपायों पर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
अदालत ने सभी नौ बाघ अभयारण्यों में वन्यजीव पशु चिकित्सकों के रिक्त पद शीघ्र भरने और कुत्तों की जन्म नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करने का भी निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने पैरवी की। याचिका मुंबई के अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने दायर की है।
जनहित याचिका के अनुसार अप्रैल और मई में आठ बाघों की मौत हुई, जिनमें बाघिन टी-122 (सुनैना), बाघिन टी-141 (अमाही), उसके चार किशोर शावक तथा युवा बाघ टी-220 (महावीर) शामिल हैं।
याचिका में इन मौतों के पीछे सीडीवी संक्रमण की आशंका जताते हुए वैज्ञानिक निगरानी, जैव सुरक्षा उपायों और पशु चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि जनवरी से अब तक राज्य में 40 बाघों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई थी।
वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 785 बाघ थे, जो देश में सर्वाधिक हैं।
भाषा सं दिमो मनीषा रंजन
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