मेघालय हनीमून हत्याकांड : मामला वृहद पीठ को भेजने पर विचार कर रहा उच्चतम न्यायालय
मनीषा
- 09 Jul 2026, 01:14 PM
- Updated: 01:14 PM
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह इस कानूनी प्रश्न को वृहद पीठ के पास विचार के लिए भेज सकता है कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में गलत वैधानिक धारा का उल्लेख, विशेष रूप से कोई टंकण त्रुटि अपने पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी को अवैध ठहराने एवं उसे जमानत देने के लिए पर्याप्त है ?
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यह भी संकेत दिया कि वह इस बात की बारीकी से जांच करेगी कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में टंकण त्रुटि के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत देने का मेघालय उच्च न्यायालय का फैसला उचित था ?
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की एक अन्य पीठ ने सोनम रघुवंशी को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से तीन जुलाई को इनकार कर दिया था।
राज्य सरकार की ओर से बृहस्पतिवार को पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह सवाल उठाया कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में गलत वैधानिक धारा का मात्र उल्लेख, विशेष रूप से टंकण त्रुटि, हत्या के इस ''स्तब्ध कर देने वाले'' मामले में गिरफ्तारी को अवैध ठहराने और जमानत देने के लिए पर्याप्त है।
उच्च न्यायालय ने सोनम रघुवंशी की जमानत को इस आधार पर बरकरार रखा था कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध कराने में विफल रही। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या के लिए सजा) के बजाय धारा 403 का उल्लेख किया गया था जो इस संदर्भ में लागू नहीं होती। अदालत ने इसे ''विवेकपूर्ण ढंग से विचार नहीं किए जाने'' का मामला बताया था।
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह पूरी तरह लिपिकीय गलती थी।
उन्होंने कहा, ''यह बहुत गंभीर मामला है जिसमें जमानत इस आधार पर दी गई कि गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए... जबकि यह रिकॉर्ड मौजूद है कि गिरफ्तारी के समय उसके आधार उपलब्ध कराए गए थे।''
हालांकि, पीठ ने कहा कि अदालत को गिरफ्तारी के समय लिखित आधार उपलब्ध कराने की आवश्यकता से जुड़े परस्पर विरोधी फैसलों में सामंजस्य बैठाना होगा।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ''हम इस मामले पर विस्तार से विचार करेंगे। हम तय करेंगे कि क्या इसे वृहद पीठ को भेजने की जरूरत है।''
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि अपराध की गंभीरता को तकनीकी टंकण त्रुटि से अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
मेहता ने कहा, ''यह वह मामला है, जिसमें दोनों मेघालय में हनीमून पर गए थे। यह पूर्व नियोजित हत्या थी। उसने एक पहाड़ी पर पति की हत्या की और शव को खाई में फेंक दिया... यह बहुत ही गंभीर अपराध है।''
पीठ ने राज्य पुलिस को आरोपियों को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट एवं पढ़ने योग्य प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरफ्तारी के समय उन्हें वास्तव में क्या जानकारी दी गई थी।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ''यदि यह आधार (तकनीकी पहलू) टिक नहीं पाता है तो जमानत आदेश रद्द हो जाएगा।''
सोनम रघुवंशी को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश पर तीन जुलाई को एक अन्य पीठ ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली आरोपी को उसके कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया था।
दंपति पिछले साल 23 मई को मेघालय में छुट्टियां मनाने के दौरान लापता हो गया था। बाद में दो जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में मिला था।
भाषा सिम्मी मनीषा
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