वायनाड भूस्खलन त्रासदी का 'राजनीतिकरण' कर रही यूडीएफ सरकार: माकपा
रंजन
- 09 Jul 2026, 12:50 PM
- Updated: 12:50 PM
तिरुवनंतपुरम, नौ जुलाई (भाषा) केरल में विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस नीत 'यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' (यूडीएफ) सरकार पर वायनाड भूस्खलन त्रासदी का ''राजनीतिकरण'' करने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बचाव कार्यों पर ध्यान देने के बजाय इस घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की।
माकपा ने कहा कि इस त्रासदी के कारणों को लेकर मंत्रियों एवं अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों से जनता का भरोसा कमजोर हुआ तथा गंभीर प्रशासनिक चूक उजागर हुई।
माकपा के मुखपत्र 'देशाभिमानी' में प्रकाशित एक संपादकीय में ये आरोप लगाए गए। इसमें सरकार पर जिम्मेदारी से बचने और आपदा को राजनीतिक विवाद में ''बदलने की कोशिश'' करने का आरोप लगाया गया।
वाम दल ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद मंत्रियों और अधिकारियों की ओर से दिए गए विरोधाभासी बयानों से लोगों में भ्रम पैदा हुआ तथा इससे तकनीकी तथ्यों को छिपाने और त्रासदी का राजनीतिकरण करने की कोशिश दिखाई देती है।
संपादकीय में कहा गया कि केरल ने पिछली आपदाओं के दौरान बचाव और पुनर्वास के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मॉडल पेश किए थे लेकिन सरकार ने इस बार ऐसे प्रयासों को प्राथमिकता देने के बजाय घटना को विवाद में बदलने और जवाबदेही से बचने की कोशिश की।
संपादकीय में आपदा के कारण को लेकर मंत्रियों के अलग-अलग बयानों का जिक्र किया गया।
इसमें कहा गया कि वायनाड के प्रभारी मंत्री टी. सिद्दीकी ने शुरुआत में इस घटना को ''मानव निर्मित आपदा'' बताया था। । उन्होंने दावा किया था कि यह प्राकृतिक भूस्खलन के कारण नहीं, बल्कि खुदाई से निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा नहीं किए जाने के कारण हुई। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने भी कहा था कि खतरा पहाड़ी ढलान धंसने से नहीं, बल्कि मिट्टी का ढेर ढहने से पैदा हुआ।
हालांकि, राजस्व मंत्री ए. पी. अनिल कुमार ने बाद में स्पष्ट किया कि आपदा वास्तव में भूस्खलन के कारण हुई थी जो पहले के रुख के विपरीत था। संपादकीय में कहा गया कि इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी अपना रुख बदल लिया।
माकपा ने यह भी आरोप लगाया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 20 जून को डाली गई मिट्टी हटाने का निर्देश दिया था लेकिन इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।
संपादकीय में कहा गया कि 25 जून को परियोजना स्थल का निरीक्षण करने वाली लोक निर्माण विभाग की टीम ने कथित तौर पर यह फैसला किया कि मिट्टी को तत्काल हटाना जरूरी नहीं है और उसने जिला अधिकारी से विचार-विमर्श कर मिट्टी रखने के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करने का निर्णय लिया।
संपादकीय के अनुसार, निर्माण कंपनी और सरकार, दोनों की ओर से एहतियाती कदम उठाने में देरी तथा विभागों के बीच समन्वय की कमी अंततः इस आपदा की वजह बनी।
पार्टी ने आरोप लगाया कि यूडीएफ के सत्ता में आने के बाद सुरंग परियोजना से संबंधित पर्याप्त निरीक्षण और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
उसने आरोप लगाया कि सुरक्षा दिशा-निर्देश केवल कागजों तक सीमित रहे और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें महज औपचारिकता बनकर रह गईं जिसके कारण लोगों की जान गई।
माकपा ने मीडिया के एक वर्ग की भी आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि घटना की वस्तुनिष्ठ रिपोर्टिंग करने के बजाय यूडीएफ समर्थक कुछ मीडिया संगठनों ने आपदा के दौरान भी विरोधाभासी बातों के जरिए सरकार का बचाव करने की कोशिश की।
भाषा
सिम्मी रंजन
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