अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन एवं कुवैत को निशाना बनाया, ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति रद्द
नरेश
- 08 Jul 2026, 03:51 PM
- Updated: 03:51 PM
दुबई, आठ जुलाई (एपी) अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन पोतों पर हमले होने के बाद बुधवार तड़के ईरान पर ''जवाबी हमले'' किए और ईरान को वैश्विक बाजार में कच्चा तेल खुले तौर पर बेचने की अनुमति देने वाले लाइसेंस को भी रद्द कर दिया। ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई के जबाव में बहरीन और कुवैत पर हमले किए।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता ''समाप्त'' हो गया है, लेकिन वह बातचीत जारी रहने देंगे। इससे चिंता बढ़ गई कि पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष फिर शुरू हो सकता है और इसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।
युद्धविराम की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह समाप्त हो चुका है।'' उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत जारी रख सकते हैं लेकिन उन्होंने उसके नतीजे को लेकर संदेह जताया। ट्रंप ने कहा, ''वे बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मेरे हिसाब से वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।''
पोतों पर हमलों से जलडमरूमध्य में ईंधन की ढुलाई फिर शुरू कराने के प्रयासों को खतरा पैदा हो गया है। यह जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।
दोनों ओर से हमले ऐसे समय में हुए, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिन तक चलने वाले अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम जारी हैं। खामेनेई 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में मारे गए थे। अंतिम संस्कार कार्यक्रम बृहस्पतिवार को समाप्त होंगे। ऐसा माना जा रहा था कि ईरान में शोक की इस अवधि में तनाव कम होगा लेकिन शोक मनाने वाले लोगों ने ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए कई बार ''मुर्दाबाद'' के नारे लगाए।
अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत को खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद बहाल किए जाने का कार्यक्रम था। इस वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर से खोलने और तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने जैसे कठिन मुद्दों पर चर्चा होनी थी लेकिन हालिया हमलों ने इस प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है। हालांकि किसी भी देश ने तत्काल यह संकेत नहीं दिया कि वह वार्ता से पीछे हटेगा।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 'एक्स' पर लिखा, ''धौंसपट्टी और जबरन वसूली का दौर खत्म हो चुका है। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम झुकते नहीं हैं।''
'यूएस सेंट्रल कमान' ने कहा कि अमेरिकी बलों ने ''एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बेकसूर नागरिकों वाले चालक दल द्वारा संचालित वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने के लिए'' ये हमले किए।
उसने कहा कि उसने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियां, रडार और ईरान के अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 60 से अधिक छोटी नौकाएं शामिल हैं।
उसने कहा कि जलडमरूमध्य में पोतों के लिए खतरा पैदा करने में इन नौकाओं की अहम भूमिका रही है।
समझौते को लेकर ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बाद बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ गई।
अमेरिकी सेना ने कहा कि समझौते का पालन नहीं होने की स्थिति में वह ईरान को जवाबदेह ठहराने के लिए ''तैयार'' है। उसने कहा कि इस दौर के हमले समाप्त हो गए हैं।
ईरान के सरकारी मीडिया ने बंदर महशहर सहित कई स्थानों पर धमाकों की खबर दी। बंदर महशहर में रिवोल्यूशनरी गार्ड का एक सदस्य मारा गया। सरकारी मीडिया ने बुशहर पर भी हमलों की खबर दी, जहां ईरान का परमाणु ऊर्जा संयंत्र परिसर स्थित है।
अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के ठिकाने बहरीन और अमेरिकी थलसेना की मौजूदगी वाले कुवैत में बुधवार सुबह मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गयी।
रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक बयान जारी कर स्वीकार किया कि उसने दोनों देशों में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
पिछले महीने के अंत में भी पोतों पर ईरानी हमलों और अमेरिका के जवाबी हमलों की ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। उसके बाद भी ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमले किए थे। बुधवार के हमले ऐसे समय में हुए जब ट्रंप उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सैन्य गठबंधन के शिखर सम्मेलन के लिए तुर्किये में थे।
संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ राजनयिक अनवर गर्गाश ने बहरीन और कुवैत पर ईरान के हमलों को ''इस बात का स्पष्ट संकेत बताया कि तेहरान तनाव कम करने और युद्ध रोकने संबंधी अनिवार्यताओं का पालन नहीं कर सकता।''
हमलों से पहले अमेरिका ने वह लाइसेंस रद्द कर दिया था, जिसके जरिए अंतरिम समझौते के तहत ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों पर रोक लगी थी और ईरान को कई वर्षों में पहली बार अमेरिकी डॉलर में खुले तौर पर तेल बेचने की अनुमति मिली थी। ईरान पर लंबे समय से संदेह रहा है कि वह प्रतिबंधित कच्चा तेल चीन को बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचता रहा है।
यह फैसला पोतों पर हुए हमलों के बाद किया गया।
'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर' ने कहा कि एक टैंकर ओमान के तट के पास था, तभी उस पर हमला हुआ और उसमें आग लग गई। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कहा कि चेतावनियों की अनदेखी करने के बाद टैंकर पर हमला किया गया, लेकिन उसने हमले की सीधी जिम्मेदारी नहीं ली।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि टैंकर में कतर की प्राकृतिक गैस थी। उन्होंने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय नौवहन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर ''अस्वीकार्य हमला'' बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता में अहम मध्यस्थ रहे कतर ने इस हमले के लिए ईरान को ''कानूनी रूप से पूरी तरह जिम्मेदार'' ठहराया है।
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी ने कहा कि दो अन्य पोतों को भी कुछ नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ और दोनों पोत अपनी यात्रा पर आगे बढ़ गए।
ईरान और अमेरिका अंतरिम समझौते के तहत 60 दिन तक पोतों को बिना शुल्क दिए जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हुए थे लेकिन तेहरान ने जोर दिया था कि पोतों के मार्गों पर उसका नियंत्रण होना चाहिए और बाद में मार्ग से गुजरने के लिए शुल्क वसूला जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इस जलमार्ग में दशकों से जारी व्यवस्था बदल जाएगी।
अमेरिका और खाड़ी के कई अरब देशों का कहना है कि वे जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान द्वारा शुल्क वसूले जाने पर सहमत नहीं होंगे।
खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम बुधवार को इराक के नजफ शहर में आयोजित किए गए। इनमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और ईरान तथा इराक के अन्य अधिकारी शामिल हुए। इराक के प्रधानमंत्री अली फलाह अल-जैदी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। बाद में कर्बला में इमाम हुसैन की दरगाह पर भी जनाजे की नमाज अदा की जाएगी।
एपी सिम्मी नरेश
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