मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई का समर्थन करें राजनीतिक दल: हिमंत
सुरेश
- 07 Jul 2026, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
गुवाहाटी, सात जुलाई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को सभी राजनीतिक दलों से मादक पदार्थों के खिलाफ राज्य सरकार के अभियान का समर्थन करने की अपील की।
शर्मा ने कहा कि विधानसभा में मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ पुलिस की 'सख्त कार्रवाई' पर सवाल उठाए जाने से कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मनोबल कमजोर होता है।
मादक पदार्थों के इस्तेमाल और तस्करी पर विधानसभा में चर्चा के दौरान शर्मा ने कहा कि सभी सदस्यों ने मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का संकल्प लिया है, लेकिन जब पुलिस तस्करों के खिलाफ 'कठोर कार्रवाई' करती है, तो उसी सदन में पुलिस पर सवाल उठाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''सदन के सभी सदस्यों ने आज मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का संकल्प लिया है, लेकिन जब पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है तो इसी विधानसभा में पुलिस पर सवाल उठाए जाते हैं।''
गृह विभाग का भी जिम्मा संभाल रहे शर्मा ने कहा कि पुलिस, बल का इस्तेमाल केवल आखिरी विकल्प के रूप में करती है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले लोग अक्सर हथियारों से लैस होते हैं और रोके जाने पर गोलीबारी शुरू कर देते हैं।
उन्होंने कहा, ''पुलिस को सख्त कार्रवाई तभी करनी पड़ती है जब उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। विधानसभा को इसे समझना और इसकी सराहना करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर हर मामले की जांच और समीक्षा की जा सकती है, लेकिन अगर पुलिस को लगातार सहयोग और समर्थन मिलता रहेगा तो वह बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी, अन्यथा उसका भी मनोबल गिरता है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर की गई कार्रवाई से म्यांमा के रास्ते होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के असम के प्रयासों को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा, ''ज्यादातर मादक पदार्थ तस्करी के मामलों की विस्तृत जांच म्यांमा तक पहुंचती है। कई बार यह मिजोरम या मणिपुर के रास्ते होती है। अब केंद्र के साथ-साथ इन दोनों राज्यों की सरकारें भी इस समस्या से निपटने के लिए मिलकर कदम उठा रही हैं।''
शर्मा ने मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने उन रिपोर्ट का उल्लेख किया जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ पुनर्वास केंद्रों ने अपने ही मरीजों को मादक पदार्थ उपलब्ध कराए।
उन्होंने कहा, ''मैं अच्छे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से आगे आने और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम करने का आग्रह करता हूं। सरकार भी उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए योजनाएं लाएगी।''
इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर ने मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए और अधिक सक्रिय कदम उठाने की मांग की।
विधानसभा में इस चर्चा में एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल और तृणमूल कांग्रेस के शर्मन अली अहमद समेत अन्य सदस्य भी शामिल हुए और तस्करों के खिलाफ अभियान तेज करने तथा कड़ी सजा देने की जरूरत बताई।
चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के म्यांमा कनेक्शन का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ''मादक पदार्थ म्यांमा से पूर्वोत्तर में आते हैं और ज्यादातर इन्हें बांग्लादेश भेजा जाता है। यही कारण है कि बराक घाटी के जिलों (जो इनके परिवहन का मार्ग हैं) में मादक पदार्थों की बरामदगी अधिक होती है।''
हजारिका ने कहा कि 2021 में शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज किया है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ बरामदगी से जुड़े मामलों की संख्या 2011 में करीब 150 थी, जो 2021 में बढ़कर 2,200 से अधिक और 2025 में 3,300 हो गई।
उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियां भी 2011 में 200 से अधिक थीं, जो 2025 में बढ़कर 4,900 से ज्यादा हो गईं।
शर्मा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 2021 से अब तक राज्य में 3,253 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और 26,537 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश
0707 2013 गुवाहाटी