वायनाड सुरंग निर्माण स्थल पर हुए हादसे के लिए पीडब्ल्यूडी जिम्मेदार नहीं : मंत्री बशीर
दिलीप
- 07 Jul 2026, 04:57 PM
- Updated: 04:57 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, सात जुलाई (भाषा) केरल के लोक निर्माण मंत्री पी.के. बशीर ने मंगलवार को कहा कि वायनाड में कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन के लिए उनके विभाग को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना का क्रियान्वयन कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन द्वारा पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान की गई एक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।
बशीर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस दुखद घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमने इस परियोजना का प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार नहीं किया था। केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी)ने कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन को विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी)के तौर पर नियुक्त किया था। कार्य कोंकण रेलवे द्वारा किया जा रहा था। इसके लिए राज्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)को दोष न दें।''
मंत्री ने कहा कि कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सत्ता में आने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने परियोजना की समीक्षा की थी और काम करने वाली एजेंसी को निर्माण स्थल पर संभावित खतरों के को लेकर आगाह किया था।
बशीर ने बताया कि 12 जून को अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक की गई थी, जिसमें पीडब्ल्यूडी सचिव, अतिरिक्त सचिव, जिलाधिकारी और कोंकण रेलवे के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी सचिव अदीला अब्दुल्ला, मुख्य अभियंता और वायनाड के जिलाधिकारी को निर्माण स्थल का निरीक्षण करने के लिए भेजा गया।
मंत्री ने कहा, ''उन्हें वहां खुदाई से निकली मिट्टी का बड़ा ढेर मिला। हमने कोंकण रेलवे को निर्देश दिया कि बारिश के दौरान कोई काम न किया जाए, ऐसे हालात में किसी भी कर्मचारी को काम पर न लगाया जाए और जमा हुई मिट्टी को हटा दिया जाए।''
उन्होंने कहा कि एक जुलाई को एक और समीक्षा बैठक हुई, जिसमें काम करने वाली एजेंसी को फिर से एहतियाती उपाय करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री ने कहा, ''हमने ये सभी निर्देश कोंकण रेलवे को दिए थे। इस परियोजना में पीडब्ल्यूडी की कोई देखरेख या काम पूरा करने की भूमिका नहीं थी। यह व्यवस्था पिछली सरकार के कार्यकाल में की गई थी।''
बशीर ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही इस परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक पर्यावरणीय मंज़ूरी मिली थी।
मंत्री से जब सवाल किया गया कि क्या यह हादसा ठेकेदारों द्वारा सरकारी निर्देशों की अनदेखी का नतीजा है, तो उन्होंने कहा कि सरकार ने कोंकण रेलवे को अपनी चिंताएं बता दी हैं और वह इस घटना की वजह बने हालात की जांच करेगी।
बशीर ने कहा, ''आपको हर चीज में राजनीति नहीं देखनी चाहिए। एक आपदा आई है। बचाव कार्य किया जा रहा है।''
पीडब्ल्यूडी सचिव अदीला अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्री ने पिछले तीन हफ्तों में समीक्षा बैठकों के दौरान बार-बार सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और निर्देश दिया था कि खराब मौसम के दौरान निर्माण स्थल पर किसी भी मजदूर को नियुक्त नहीं किया जाए।
उन्होंने कहा, ''नतीजतन, भूस्खलन में कोई भी मजदूर हताहत नहीं हुआ है। प्रभावित लोग अभियंता और सुरक्षाकर्मी हैं। अगर नियमित काम चल रहा होता, तो यह त्रासदी और भी भयावह हो सकती थी।''
अब्दुल्ला ने कहा कि भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अभी जमा हुई मिट्टी को न छेड़ा जाए और मीनाक्षी नदी के पास ढलान पर रहने वाले लोगों को, अगर जरूरत पड़ी तो, ठेकेदारों के खर्च पर दूसरी जगह बसाना पड़ सकता है।
भाषा धीरज दिलीप
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