तृणमूल विवाद: ममता गुट ने निर्वाचन आयोग को जवाब सौंपा, बागी गुट के दावे को फर्जी बताया
नरेश
- 06 Jul 2026, 05:03 PM
- Updated: 05:03 PM
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को अपना जवाब सौंपते हुए पार्टी पर प्रतिद्वंद्वी गुट के दावे को ''फर्जी'' करार दिया और कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार दल की संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं।
निर्वाचन आयोग को जवाब सौंपने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी की ओर से दिए गए प्रतिवेदन के जवाब में निर्वाचन आयोग को ''बहुत विस्तृत उत्तर'' दाखिल किया है।
उन्होंने बागी गुट के इस प्रमुख दावे को खारिज कर दिया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस(एआईटीसी) की समिति और राष्ट्रीय कार्य समिति का कार्यकाल वर्ष 2025 में समाप्त हो गया था।
लोकसभा सदस्य बनर्जी ने कहा कि पार्टी संविधान में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष तथा वर्ष 2006 में पांच वर्ष कर दिया गया था और इन संशोधनों की जानकारी निर्वाचन आयोग को भी दी गई थी।
उन्होंने बताया, ''पिछला संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुआ था। इसलिए तृणमूल समिति और राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का कार्यकाल स्वतः पांच वर्ष का है। यह वर्ष 2027 में समाप्त होगा।''
उन्होंने कहा कि समिति का कार्यकाल वर्ष 2025 में समाप्त होने का आरोप ''गलत है और पार्टी के संवैधानिक प्रावधानों से समर्थित नहीं है।''
बनर्जी ने यह भी कहा कि बागी नेताओं ने स्वयं मौजूदा पार्टी नेतृत्व के अधिकार को स्वीकार किया था क्योंकि उन्होंने वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था और उनके नामांकन पत्रों पर पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी के हस्ताक्षर थे।
उन्होंने कहा, ''यदि उनका कहना है कि पार्टी वर्ष 2025 के बाद अस्तित्व में नहीं रही तो फिर उन्होंने किस आधार पर चुनाव लड़ा? उनके अपने तर्क के अनुसार उनका चुनाव अवैध हो जाएगा। उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।''
तृणमूल नेता ने यह भी आरोप लगाया कि बागी गुट ने 22 जून को आयोजित ''विशेष अधिवेशन'' में पार्टी संगठन के पुनर्गठन का जो दावा किया, वह अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संविधान का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार संगठनात्मक प्रक्रिया की शुरुआत ब्लॉक स्तर से होती है। इसके बाद जिला और राज्य समितियों का गठन किया जाता है और फिर एआईटीसी समिति का गठन होता है।
उनका आरोप था कि बागी गुट ने इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया तथा मीडिया में अनिवार्य सार्वजनिक सूचना जारी करने और सांसदों एवं विधायकों को नोटिस देने जैसी आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी नहीं कीं।
बनर्जी ने कहा, ''न तो मीडिया में कोई सूचना जारी की गई, न ही उचित तरीके से जानकारी प्रसारित की गई और न ही पदेन सदस्यों को कोई नोटिस दिया गया। उनके द्वारा गठित कथित एआईटीसी स्वयं एआईटीसी संविधान के साथ एक बड़ा छल है।''
तृणमूल सांसद ने प्रतिद्वंद्वी गुट की कार्रवाई को ''पूरी तरह फर्जी'' बताते हुए कहा कि बागियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह से अवैध है तथा पार्टी संविधान के विपरीत है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह गुट राज्य प्रशासन के सहयोग से अवैध तरीके से पार्टी कार्यालयों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है।
निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट, दोनों से पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों को लेकर अपने-अपने दावे और प्रतिदावे प्रस्तुत करने को कहा था।
यह विवाद तब और गहरा गया जब बागी गुट ने पिछले सप्ताह निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर दावा किया कि वही ''असली'' एआईटीसी का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं, ममता बनर्जी गुट ने आयोग द्वारा उन नेताओं को सुनवाई का अवसर दिए जाने पर सवाल उठाया जिन्हें वह पहले ही पार्टी से निष्कासित बता चुका है।
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