पति-पत्नी के बीच आम झगड़े क्रूरता नहीं: आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में तीन व्यक्ति बरी
अविनाश
- 03 Jul 2026, 06:54 PM
- Updated: 06:54 PM
ठाणे, तीन जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने वर्ष 2018 में 21 वर्षीय पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उसके पति और सास-ससुर को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि ''वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य खटपट को क्रूरता नहीं माना जा सकता।''
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए. पाटकी ने बृहस्पतिवार को अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों द्वारा की गई क्रूरता की किसी विशिष्ट घटना या उनके कृत्यों और महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने में विफल रहा।
जान गंवाने वाली महिला निशा पेशे से नर्स थी और उसने दिसंबर 2016 में अनिल रंगनाथ गायकवाड़ (31) से विवाह किया था। विवाह के बाद वह ठाणे में पति तथा सास सोजर गायकवाड़ (56) और ससुर रंगनाथ गायकवाड़ (71) के साथ रहती थी।
निशा ने 14 मई, 2018 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद वर्तक नगर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए (क्रूरता) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसावा) के तहत मामला दर्ज किया था।
निशा के परिजनों का आरोप था कि उसे घरेलू कामकाज को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उससे सोने की चेन की मांग की जाती थी और उसके कपड़े पहनने पर भी पाबंदियां लगाई जाती थीं।
परिजनों के अनुसार, गायकवाड़ परिवार उस पर साड़ी पहनने का दबाव डालता था।
न्यायाधीश पाटकी ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में विशिष्टता के अभाव और उसके गवाहों के बयानों में विरोधाभास का उल्लेख करते हुए कहा, ''वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य खटपट, घरेलू स्तर के सामान्य मतभेद या मामूली झगड़े तब तक क्रूरता नहीं माने जा सकते, जब तक कि संबंधित आचरण कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों को पूरा न करता हो।''
अदालत ने यह भी कहा कि दंपति सास-ससुर से अलग, उसी मकान की दूसरी मंजिल पर रहते थे।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार नासिक में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल नहीं हो सका, जिससे निशा आहत हो गई थीं और आत्महत्या कर ली।
अदालत ने कहा, ''ऐसी घटनाएं किसी भी परिवार में सामान्य रूप से होती हैं। ऐसा नहीं था कि केवल निशा को ही समारोह में जाने से रोका गया था। स्वयं आरोपी भी अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल नहीं हुए थे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी घटनाएं अधिक से अधिक पारिवारिक मतभेद या क्षणिक नाराजगी का कारण बन सकती हैं, लेकिन इन्हें इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि आरोपियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए निशा को उकसाया।''
इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
भाषा
राखी अविनाश
अविनाश
0307 1854 ठाणे