बंबई उच्च न्यायालय ने बांद्रा और वर्ली में म्हाडा के दो संकुल पुनर्विकास योजनाओं का रास्ता साफ किया
सुरेश
- 02 Jul 2026, 08:31 PM
- Updated: 08:31 PM
मुंबई, दो जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने म्हाडा द्वारा प्रस्तावित बांद्रा रिक्लेमेशन और वर्ली के आदर्श नगर में संकुल पुनर्विकास परियोजनाओं का रास्ता बृहस्पतिवार को साफ कर दिया।
अदालत ने महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के पुनर्विकास के फैसले और निर्माण एवं विकास एजेंसी को नियुक्त करने के लिए शुरू की गई निविदा प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति एम एस कर्णिक और न्यायमूर्ति एस एम मोदक की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि संकुल पुनर्विकास शहर को सुनियोजित और समावेशी तरीके से विकसित करने का एक व्यावहारिक तरीका है।
अदालत ने कहा, ''मुंबई शहर को आगे बढ़ना होगा और बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलना होगा, ताकि फलते-फूलते बाजारों और आर्थिक अवसरों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।''
पीठने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार के फैसलों को मनमाना या अतार्किक नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने रेखांकित किया कि वर्ली में लगभग 34.33 एकड़ जमीन वाले आदर्श नगर योजना और बांद्रा में लगभग 98.27 एकड़ ज़मीन वाले बांद्रा रिक्लेमेशन योजना में कई पुरानी इमारतें हैं, जिन्हें दशकों पहले बनाया गया था।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने एक नीतिगत फैसला लिया है कि इन बस्तियों का पुनर्विकास चरणबद्ध करने के बजाय, एक एकीकृत और सुनियोजित तरीके से किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि एकीकृत पुनर्विकास से उचित अवसंरचना, खुली जगह, अंदरूनी सड़कें, पार्किंग, सुविधाएं, नालियां, पानी की आपूर्ति और पूरे नक्शे के समन्वय के साथ विकास कार्य सुनिश्चित होता है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पुनर्विकास का काम चरणबद्ध किया जाए या एकीकृत तरीके से किया जाए, यह तय करना राज्य सरकार और म्हाडा की योजपा एवं नीति से जुड़ा निर्णय है।
पीठ ने कहा कि अदालतों को सरकार के नीतिगत फैसलों में दखल नहीं देना चाहिए, जब तक कि वह फैसला पूरी तरह मनमाना न हो या व्यापक जनहित में न हो।
राज्य सरकार ने 25 अप्रैल और 15 दिसंबर, 2025 के जारी सरकारी आदेशों के जरिए शहर और उसके उपनगरों में 20 एकड़ या उससे ज़्यादा बड़े वाले इलाके में म्हाडा द्वारा एकीकृत या संकुल पुनर्विकास करने की नीति बनाई थी।
सरकार ने म्हाडा के जरिए 1950 और 1960 के बीच आदर्श नगर और बांद्रा रिक्लेमेशन में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती घरों वाली 56 कॉलोनियां बनाई थीं। इन कॉलोनियों में अब 5000 आवासीय सोसाइटी हैं, जिनमें से कुछ की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं।
अदालत में याचिका दायर करने वाली कुछ सोसाइटी ने दलील दी थी कि उन्हें संकुल पुनर्विकास का हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके स्वतंत्र पुनर्विकास के अधिकार छिन रहे हैं।
उन्होंने दलील दी कि आदर्श नगर में समुद्र के सामने वाली इमारतों में रहने वाले लोगों को संकुल पुनिर्विकास के तहत किसी दूसरी जगह पर बसाया जा सकता है और वे अपने मौजूदा इलाके से वंचित हो जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि 'संकुल पुनर्विकास' एक सुनियोजित शहरी नियोजन प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी पुराने, जर्जर या अव्यवस्थित क्षेत्र (जैसे झुग्गी-बस्तियां, पुराने हाउसिंग सोसाइटियों के समूह, या जीर्ण-शीर्ण आवासीय परिसर) की कई इमारतों को मिलाकर एक आधुनिक बहुमंजिला परिसर में बदला जाता है।
'रिक्लेमेशन' का शाब्दिक अर्थ उस ज़मीन से है जिसे समुद्र के किसी क्षेत्र में भराव करके या पानी को सुखाकर इंसानी उपयोग के लिए बनाया गया हो।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
0207 2031 मुंबई