दिल्ली के अस्पताल में पापुआ न्यू गिनी के दो बच्चों की जन्मजात रीढ़ संबंधी जटिल विकृतियों का सफल इलाज
सुरेश
- 01 Jul 2026, 12:06 AM
- Updated: 12:06 AM
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) दिल्ली के एक अस्पताल ने पापुआ न्यू गिनी के दो बच्चों में जन्म से मौजूद रीढ़ की हड्डी की जटिल विकृतियों का सफलतापूर्वक उपचार किया है। इनमें से एक बच्ची सर्जरी के बाद पहली बार पीठ के बल लेट सकी। अस्पताल ने एक बयान में यह जानकारी दी।
साकेत स्थित निजी अस्पताल ने एक बयान में बताया कि पांच और सात वर्ष आयु के ये दोनों बच्चे जन्म से ही जटिल न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (एनटीडी) से पीड़ित थे। यह जन्मजात विकृति मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास को प्रभावित करती है। दोनों बच्चों के निचले अंगों में लकवा था और जन्म से ही मूत्राशय पर उनका नियंत्रण नहीं था।
अस्पताल ने बताया कि पांच वर्षीय बच्ची की पीठ के निचले हिस्से में 10 सेंटीमीटर लंबी और 12 सेंटीमीटर चौड़ी सूजन थी, जिसके कारण वह पीठ के बल नहीं लेट पाती थी और उसे करवट लेकर सोना पड़ता था। वह स्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी के टेढ़ेपन) से भी पीड़ित थी तथा उसके निचले अंगों में संवेदना पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी।
अस्पताल के अनुसार, बच्ची के सात वर्षीय रिश्ते के भाई की रीढ़ की हड्डी में सूजन थी। उसकी पहले एक अन्य देश में सुधारात्मक सर्जरी की गई थी, जिसके बाद उसके दोनों पैरों की गतिशीलता समाप्त हो गई थी। वर्ष 2018 में उसकी एक प्रक्रिया भी की गई थी।
अस्पताल ने बताया कि पापुआ न्यू गिनी में विशेषज्ञ ऑपरेशन से इलाज उपलब्ध नहीं होने के कारण दोनों बच्चों के परिवार भारत आए और उन्नत न्यूरोसर्जरी उपचार के लिए अस्पताल से संपर्क किया।
अस्पताल के डॉ. दलजीत सिंह ने कहा, ''ये मामले न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की जटिलता और इसके अलग-अलग स्वरूपों को दर्शाते हैं। हालांकि दोनों बच्चों में लकवा और मूत्राशय की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसे समान लक्षण थे, लेकिन उनकी बीमारियों का भ्रूणीय (एम्ब्रायोलॉजिकल) आधार पूरी तरह अलग था।''
अस्पताल के अनुसार, बड़े बच्चे की सर्जरी के दौरान रीढ़ की विकृति को सावधानीपूर्वक हटाकर उसकी मरम्मत की गई। इसके बाद पीठ पर बने बड़े त्वचा दोष को ठीक करने के लिए सर्जरी की गई। वहीं, बच्ची की रीढ़ में मौजूद विकृति को हटाकर उसकी मरम्मत की गई।
अस्पताल ने बताया कि सात वर्षीय बच्चे को सर्जरी के 10 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि पांच वर्षीय बच्ची को ऑपरेशन के आठवें दिन छुट्टी दे दी गई।
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