कॉजपा का प्रदर्शन 11वें दिन भी जारी; वांगचुक का ब्लड शुगर स्तर गिरा
अविनाश
- 30 Jun 2026, 07:06 PM
- Updated: 07:06 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का प्रदर्शन मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान, प्रदर्शन स्थल पर तीन दिन से अनशन पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के ब्लड शुगर के स्तर में गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर हमला तेज करते हुए आंदोलन के प्रति उसके रवैया की आलोचना की।
आयोजकों की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को वांगचुक का रक्तचाप 117/60, ऑक्सीजन लेबल 96 और नब्ज 92 दर्ज की गई, जबकि उनके ब्लड शुगर का स्तर 66 था, जो सामान्य से कम है।
वांगचुक की जांच करने वाले डॉक्टर ने कहा, "यहां बहुत ज्यादा गर्मी है। ऐसे हालात में बिना खाने के रहना मुश्किल है। हम उनकी सेहत का ध्यान रख रहे हैं।"
कॉजपा के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि वांगचुक की हालत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वांगचुक को कुछ होता है, तो इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार होंगे।
वहीं, दीपके ने प्रदर्शनकारियों की तुलना "वायरस" से करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां शिक्षा मंत्री ने उन्हें "आतंकवादी" करार दिया, वहीं भाजपा अध्यक्ष ने उनकी तुलना "वायरस" से की, जबकि प्रदर्शनकारी महज छात्रों और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
दीपके ने कहा, "हम वायरस नहीं हैं। हम धर्मेंद्र प्रधान नामक 'वायरस' के खिलाफ टीका हैं।"
उन्होंने राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में खामियों का इतिहास रहा है।
दीपके ने दावा किया कि प्रश्नपत्र जयपुर के एक कॉलेज से लीक हुआ था और हाल के महीनों में कई परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आई हैं।
उन्होंने कहा, "यह न सोचें कि मामला सिर्फ नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) प्रश्नपत्र लीक तक सीमित है। अगर आप आज आवाज नहीं उठाएंगे, तो कल आपका प्रश्नपत्र भी लीक हो सकता है और आपकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।"
दीपके ने अभिभावकों से अपील की कि वे डर के कारण अपने बच्चों को विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने से न रोकें।
उन्होंने छात्रों को विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा शिक्षा से जुड़े हर व्यक्ति को प्रभावित करता है।
जंतर-मंतर पर प्रवेश संबंधी पाबंदियों के बारे में दीपके ने कहा कि कोर टीम के कुछ सदस्यों और समर्थकों को प्रदर्शन स्थल के पास रोका गया था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इन लोगों को पहचानपत्र न होने की वजह से अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई थी।
दीपके ने सवाल उठाया कि क्या जंतर-मंतर आने के लिए आम नागरिक को भी पहचानपत्र की जरूरत होती है।
इससे पहले, दीपके ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन स्थल पर बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और किसान नेताओं तथा छात्र कार्यकर्ताओं को विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है।
उन्होंने दावा किया था कि कई किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है और सवाल उठाया कि प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों के खिलाफ ऐसे कदम क्यों नहीं उठाए गए।
दीपके ने कहा, "काश प्रश्नपत्र लीक माफिया पर भी ऐसा दबाव बनाया गया होता। अगर ऐसा किया जाता, तो शायद इन छात्रों की जान नहीं जाती।"
उन्होंने दावा किया कि पुलिस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
दीपके ने कहा, "जिन लोगों ने किसी का सिर फोड़ दिया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है, लेकिन यहां आने वाले समर्थकों को रोकने पर इतना ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की मौजूदगी का मकसद सुरक्षा बनाए रखने के बजाय प्रदर्शनकारियों के लिए की गई व्यवस्थाओं को बाधित करना है।
दीपके ने कहा कि तमाम पाबंदियों और व्यवधानों के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, "हम यहां डटे रहेंगे। एक व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डाल रहा है; आप हमसे और क्या उम्मीद करते हैं?"
सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए दीपके ने कहा कि इस स्थिति के लिए प्रधान जिम्मेदार हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों पर ध्यान दे रही है।
दीपके ने कहा कि प्रधानमंत्री राजनीतिक मामलों में व्यस्त हैं, जिनमें "पार्टियां तोड़ना", "सांसदों की खरीद-फरोख्त", विदेश यात्रा और "तोहफे में मेलोडी चॉकलेट देना" शामिल है। उनकी इस टिप्पणी पर भीड़ ने तालियां बजाईं।
दीपके ने छात्रों की आत्महत्या के लिए भी प्रधान को कसूरवार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पहली घटना के बाद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।
दीपके ने कहा, "20 से ज्यादा छात्रों की जान चली गई है। इन छात्रों की मौत के लिए प्रधान कसूरवार हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधान को उन छात्रों के परिवारों से बात करनी चाहिए, जिनकी मौत हुई है।
परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर कॉजपा का विरोध-प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था।
दीपके ने कहा है कि यह आंदोलन सिर्फ शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही से जुड़े अन्य मुद्दों को भी उठाया जाएगा, जिनमें चुनावी मामले, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शामिल हैं।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
3006 1906 दिल्ली