सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने पर काम कर रही है सरकार
संतोष
- 29 Jun 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरह के फार्मूलों पर काम कर रही है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
साथ ही, सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक के नए मसौदे को प्रभावी बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया जा रहा है कि आबादी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि सरकार इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।
पहले वाले विधेयक को आधार बनाते हुए, नए मसौदे में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि यह उन प्रस्तावों में से एक है जिन पर सरकार काम कर रही है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि अभी की जा रही जनगणना के आंकड़े आने बाकी हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार को जब संख्याबल का भरोसा हो जाएगा उसके बाद ही विधेयक संसद में पेश किया जाएगा।
अभी सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 360 के आंकड़े की जरूरत है।
मौजूदा कानून के तहत, महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने से जुड़ी हुई है।
इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' यानी महिला आरक्षण कानून में बदलाव की जरूरत थी।
सरकार की योजना के अनुसार, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 कर दी जाएगी।
अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी।
विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें "किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी"।
भाषा प्रशांत संतोष
संतोष
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