खनिज निकालने के लिए झारखंड को चारागाह की तरह समझा गया: मुख्यमंत्री
अविनाश
- 29 Jun 2026, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
रांची, 29 जून (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य से खनिज संसाधन निकालने और देश व दुनिया की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इसे "चारागाह की तरह समझा गया", लेकिन यहां के लोग अपने पैरों पर कैसे खड़े हों, इसकी बहुत चिंता नहीं की गई।
सोरेन ने यह टिप्पणी यहां एक कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त 1,042 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए की।
उन्होंने कहा, "समाज को दिशा दिखाने और बेहतर माहौल तैयार करने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के जो भी अग्रणी राज्य हैं, वे सभी शिक्षा के क्षेत्र में आगे हैं।
सोरेन ने कहा, "हम भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते थे, लेकिन दुर्भाग्य से खनिज संसाधन निकालने और देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इस राज्य को सिर्फ एक चारागाह माना गया। इस बात की चिंता बहुत कम रही कि यहां के लोग अपने पैरों पर कैसे खड़े हो सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को गति देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
सोरेन ने कहा, "अब झारखंड के युवा न केवल देश के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में, बल्कि विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हम एक ज्ञानवर्धक समाज और शिक्षित भावी पीढ़ी का निर्माण करना चाहते हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के पिछले कार्यकाल में लगभग 55,000 लोगों को नियुक्तियां दी गई थीं और दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने के दो महीने बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
एक अधिकारी ने बताया कि पिछले छह महीनों में 9,812 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार युवाओं को लगातार नौकरी और रोजगार देने तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। हर एक नियुक्ति झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक मजबूत नींव है।"
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए सोरेन ने कहा, ''केवल राजनीतिक हितों को साधने के लिए एक माहौल तैयार किया जा रहा है। यह एक स्वस्थ माहौल नहीं है। विकृत मानसिकता वाली कुछ ताकतें समाज में नफरत फैलाने और आग लगाने पर आमादा हैं, जो अंततः सभी के लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं।''
उन्होंने कहा, ''नफरत की आग जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती। यह केवल अपना काम करती है और तबाही का रास्ता चुनती है।''
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें अपने आसपास ऐसा माहौल नहीं बनने देना चाहिए जहां हम एक-दूसरे को विभाजनकारी चश्मे से देखें।"
उन्होंने शिक्षकों से सरकार की आंख, कान और नाक बनने का आग्रह किया और विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश फैलाने की अपील की।
भाषा सुमित अविनाश
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