राममंदिर चंदा चोरी के आरोपी कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक बहिष्कार का भी सामना कर रहे: भाजपा
माधव
- 29 Jun 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कहा कि राममंदिर के चंदे की कथित चोरी के मामले के आरोपी ना केवल कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, बल्कि उनका सामाजिक बहिष्कार भी हो रहा है, जो हिंदू समाज की भावनाओं को दर्शाता है।
सत्तारूढ़ दल भाजपा ने फैजाबाद बार एसोसिएशन के एक प्रस्ताव का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया है कि उसके कोई भी सदस्य राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेंगे। इसमें साथ ही चेतावनी दी गई है कि इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले किसी भी वकील पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी और जल्द न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह निर्णय हिंदू समाज की भावनाओं का प्रतिबिंब है और यह स्पष्ट संदेश देता है कि आस्था के साथ विश्वासघात करने वालों या ऐसे विश्वासघात का बचाव करने वालों को समाज का आशीर्वाद कभी नहीं मिलेगा।
उन्होंने बार एसोसिएशन के निर्णय पर सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह हिंदू समाज का एक सशक्त संदेश है। अयोध्या में लूट के आरोपी ना केवल कानून की कठोर कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, बल्कि उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जा रहा है।''
भंडारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ''तुष्टीकरण की राजनीति'' के कारण ''वोट बैंक'' की खातिर बार-बार आरोपियों के साथ खड़े होते रहे हैं। उन्होंने दावा किया, ''समाजवादी पार्टी ने अयोध्या और वाराणसी विस्फोट मामलों के आरोपियों का समर्थन किया। कपिल सिब्बल जैसे वकीलों ने भी नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और दिल्ली दंगों जैसे चर्चित मामलों में आरोपियों का पक्ष रखा है।''
उन्होंने कहा, ''अंतर स्पष्ट है: हिंदू सभ्यता सदियों से इसलिए कायम है क्योंकि उसने मुगल आक्रमणकारियों, कांग्रेस तंत्र और इसे कमजोर करने की वोट बैंक की राजनीति के बार-बार के प्रयासों के बावजूद धर्म को व्यक्तियों से ऊपर रखा है।''
भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि पार्टी फैजाबाद बार एसोसिएशन के निर्णय के पीछे की ''भावनाओं और आक्रोश'' को समझती है, लेकिन यह मामला अंततः कानून के अनुसार ही सख्ती से निपटाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ''हम फैजाबाद बार एसोसिएशन की भावनाओं और आक्रोश से पूरी तरह जुड़ाव महसूस करते हैं। लेकिन भारत एक ऐसा देश है जहां कानून का शासन सर्वोपरि है और मामला कानून के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।''
सिन्हा ने कहा, ''मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसी सजा दी जाएगी जो मिसाल बनेगी और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।''
सोमवार को यह प्रस्ताव बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में पारित किया गया। इससे एक दिन पहले रविवार को वकीलों ने संकेत दिया था कि वे आरोपियों का पक्ष नहीं लेंगे, क्योंकि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
गिरफ्तार आठ आरोपियों-अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव-का संबंध राम मंदिर में प्राप्त नकद और अन्य चढ़ावे की गणना के कार्य से था।
उन्हें कथित गबन के मामले में गिरफ्तार किया गया है और अदालत ने उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव (जिनका प्राथमिकी में आरोपी के रूप में उल्लेख नहीं है) से अयोध्या ''छोड़ने'' की भी मांग की।
वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर ये तीनों अयोध्या नहीं छोड़ते हैं, तो पूरे शहर की घेराबंदी की जाएगी और किसी को भी शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
भाषा अमित माधव
माधव
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