यूक्रेन जैसी ड्रोन सफलता पाने के लिए बेताब देशों को पहले बदलनी होगी अपनी सैन्य संस्कृति
दिलीप
- 27 Jun 2026, 06:03 PM
- Updated: 06:03 PM
(जेम्स हॉर्नकैसल, साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी)
बर्नाबी (कनाडा), 27 जून (द कन्वरसेशन) यूक्रेन के ड्रोन हमले रूसी क्षेत्रों को तबाह कर रहे हैं। रूसी कब्जे वाले क्रीमिया का सबसे बड़ा शहर, सेवास्तोपोल इसका शिकार होने वाला नवीनतम क्षेत्र है, जहां यूक्रेनी ड्रोन द्वारा क्षेत्र के ऊर्जा संयंत्रों पर किए गए हमलों के बाद बिजली गुल हो गई है।
क्रीमिया को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन, दोनों के लिए गहरा प्रतीकात्मक महत्व जुड़ा हुआ है।
वर्ष 2014 में क्रीमिया यूक्रेन का पहला क्षेत्र था, जिसका रूस ने विलय किया था। ऐसे में इस घटनाक्रम का भी बड़ा प्रतीकात्मक महत्व माना जा रहा है।
इसके अलावा, इस संघर्ष में रूसी अर्थव्यवस्था और पुतिन की प्रतिष्ठा दोनों को ड्रोन द्वारा नुकसान पहुंचाया जाना आम बात होती जा रही है।
संघर्ष के दौरान यूक्रेन ने ड्रोन का बेहद प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया है।
वर्ष 2022 में युद्ध के शुरुआती चरण में यूक्रेन ने तुर्किये में निर्मित बाइरक्तार ड्रोन का सफलतापूर्वक उपयोग करते हुए रूस के आक्रमण की गति और उसकी योजनाओं को प्रभावित किया था।
यूक्रेन को सबसे बड़ी सफलताएं उसके अपने घरेलू ड्रोन उद्योग से हुई है।
यूक्रेन के पास कई मजबूत विकल्प
यूक्रेन का घरेलू ड्रोन उद्योग अब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ उद्योगों में गिना जाता है। ड्रोन ने यूक्रेन को न केवल रूस के साथ युद्ध में, बल्कि अन्य देशों के साथ अपने संबंधों में भी महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त प्रदान की है।
वास्तव में, यूक्रेन की ड्रोन प्रौद्योगिकी इतनी उन्नत है कि हाल में ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के दौरान खाड़ी देशों ने ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने के उपायों पर यूक्रेनी अधिकारियों से परामर्श किया था।
यूक्रेन को ड्रोन क्षेत्र में मिली बड़ी सफलता ने दुनिया भर के सैन्य और राजनीतिक प्रतिष्ठानों का ध्यान इस प्रौद्योगिकी की क्षमताओं की ओर केंद्रित कर दिया है।
कनाडा की सेना ड्रोन अनुसंधान पर लगभग एक अरब डॉलर खर्च करने की तैयारी कर रही है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ड्रोन युद्ध की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं, जैसा कि यूक्रेन, ईरान और अन्य क्षेत्रों के संघर्षों में स्पष्ट रूप से देखा गया है।
इसके बावजूद, ड्रोन अभी व्यापक स्तर पर युद्ध की प्रकृति को मूल रूप से बदल नहीं रहे हैं।
वास्तव में, यूक्रेन कई अन्य क्षेत्रों में अपनी कमियों की भरपाई के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहा है।
युद्ध में ड्रोन की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन देश पूरी तरह उन पर निर्भर नहीं रह सकते।
साथ ही, ड्रोन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त सैन्य संस्कृति और कार्यप्रणाली का होना भी आवश्यक है।
यूक्रेन का ड्रोन उद्योग
युद्ध की शुरुआत के समय यूक्रेन का ड्रोन उद्योग अपेक्षाकृत छोटा था। अधिकांश ड्रोन विदेश से आयात किए जाते थे, हालांकि देश में ड्रोन से जुड़ा एक छोटा लेकिन उत्साही समुदाय मौजूद था।
जब वर्ष 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तब इस ड्रोन समुदाय के सदस्यों ने सेना में भर्ती होकर और अन्य तरीकों से रूस के खिलाफ यूक्रेनी प्रतिरोध का समर्थन किया।
उन्होंने रूसी गतिविधियों की निगरानी करने और विभिन्न प्रकार के ड्रोन का इस्तेमाल कर रूसी सैन्य ठिकानों एवं संसाधनों पर हमला करने में अत्यधिक प्रभावशीलता दिखाई।
खुफिया जानकारी और हमलों में ड्रोन की भूमिका
यूक्रेन की राजनीतिक और सैन्य जरूरतों ने ड्रोन के इस्तेमाल को आवश्यक बना दिया।
साथ ही, ड्रोन प्रौद्योगिकी के समर्थकों के आकलन के विपरीत, यूक्रेन ड्रोन का इस्तेमाल किसी क्रांतिकारी तरीके से नहीं कर रहा है।
इसके बजाय, वह ड्रोन का उपयोग उन कार्यों के लिए कर रहा है, जिन्हें सशस्त्र बल पिछले एक सदी से भी अधिक समय से करते आ रहे हैं।
कम दूरी तक मार करने वाले यूक्रेनी ड्रोन युद्धक्षेत्र से खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ रूसी बलों पर हमले करने की क्षमता भी प्रदान करते हैं।
अन्य देशों की सेनाओं में यही काम विभिन्न सेंसर, तोपखाने और अन्य हथियार प्रणालियां करती हैं।
वहीं, मध्यम और लंबी दूरी तक मार करने वाले यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के रसद केंद्रों के साथ-साथ उसके भीतर स्थित ऊर्जा अवसंरचना को भी निशाना बनाया है।
आसानी से नहीं सीखा जा सकता
प्रौद्योगिकी के मामले में अक्सर यह बात भुला दी जाती है कि केवल उपकरण ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि उन्हें चलाने वाले लोग भी उतने ही अहम होते हैं।
सेनाएं आमतौर पर परंपरागत सोच वाली संस्थाएं होती हैं, जो बदलाव का विरोध करती हैं।
यूक्रेन ने आवश्यकता के कारण ऐसी कार्य संस्कृति विकसित की है, जो देश की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी को खुले तौर पर अपनाती है।
यह स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि युद्ध को कुछ हद तक खेल जैसी रणनीतियों और तरीकों से भी जोड़ा जाने लगा है।
रूस भी ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन कहीं अधिक मजबूत आर्थिक और औद्योगिक क्षमता होने के बावजूद वह यूक्रेन जितना प्रभावी साबित नहीं हुआ है।
इसका एक बड़ा कारण रूस द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का तरीका है।
रूस में, ड्रोन ऑपरेटरों के रूप में भर्ती किए गए लोगों को (ड्रोन उड़ाने के बजाय) अग्रिम पंक्ति की पैदल सेना की जगह इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि रूसी कमांडरों द्वारा पसंद किए जाने वाले नुकसानदेह और विनाशकारी हमलों को अंजाम दिया जा सके।
यही वजह है कि रूस न केवल खुद को कुशल ड्रोन ऑपरेटरों से वंचित कर रहा है, बल्कि रूसी सेना द्वारा इन ड्रोन प्रेमियों के साथ किए जा रहे इस तरह के बर्ताव की मीडिया रिपोर्ट के कारण अब और अधिक लोग सेना में भर्ती होने से कतरा रहे हैं।
हालांकि कई देश यूक्रेन की सफल ड्रोन रणनीतियों की नकल करने की कोशिश करेंगे, लेकिन केवल प्रौद्योगिकी पर्याप्त नहीं है।
रूसी और यूक्रेनी सेनाओं के बीच स्पष्ट अंतर यह साबित करता है कि सैन्य संस्कृति का महत्व हथियारों जितना ही है, बल्कि कई बार उनसे भी अधिक होता है।
इस नई प्रौद्योगिकी का वास्तविक लाभ उठाने के लिए किसी भी सेना को सबसे पहले ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करनी होगी, जो इसकी पूरी क्षमता का उपयोग कर सके।
(द कन्वरसेशन) जितेंद्र दिलीप
दिलीप
2706 1803 बर्नाबी (कनाडा)