राम मंदिर से 'चढ़ावा चोरी' मामले में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच जरूरी: कांग्रेस
नेत्रपाल
- 26 Jun 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में पूरी सच्चाई सामने लाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच जरूरी है।
मुख्य विपक्षी दल ने श्रीराम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने और इसके पुनर्गठन की भी मांग की।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''सत्य और धर्म को स्थापित करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और उनके करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ जो चोरी और लूट का कपटपूर्ण कृत्य किया गया है, उसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है।''
उन्होंने कहा, ''भगवान राम करोड़ों मन का पवित्र भाव हैं। उसी पवित्र भाव से लोग मंदिर में माथा टेकते हैं और दान करते हैं।''
प्रियंका ने कहा कि राम मंदिर में चोरी करने वालों ने धर्म तथा आस्था की मूल भावना को खंडित करने का महापाप किया है।
उन्होंने कहा, ''यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले सीसीटीवी बंद कर हजारों करोड़ के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है?''
कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस मामले में जांच के नाम पर लीपापोती करने की जगह पारदर्शी तरीके से जांच हो और जो भी लोग चोरी के काम में संलिप्त हैं, उन्हें कड़ी सजा मिले।
वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने संवाददाताओं से कहा, ''चंपत राय या अनिल मिश्रा के इस्तीफे से इस समस्या का हल नहीं होने वाला। अगर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये की लूट हुई है, तो क्या वह पैसा सिर्फ चंपत राय तक ही गया? यह बहुत बड़ा मुद्दा है। चंपत राय से ऊपर के ऊपर का मसला है।''
शुक्ला ने आरोप लगाया कि भगवान राम में आस्था रखने वाले लोगों से एकत्र किए गए चंदे का दुरुपयोग हुआ है और मामले में असली जिम्मेदार लोगों के बजाय छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि क्या बड़े लोगों की मिलीभगत के बिना कोई छोटा कर्मचारी सीसीटीवी बंद कर इतनी बड़ी राशि की चोरी कर सकता है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मंदिर में नकद चढ़ावे को कम दिखाया जाता था और महिलाओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया। उन्होंने कहा, ''यह लोगों की धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात है।''
शुक्ला ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मंदिरों के न्यासों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चंदे और चढ़ावे का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई कराएं।
शुक्ला ने यह भी मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर उसमें राजनीतिक व्यक्तियों के स्थान पर साधु-संतों और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग उठाई।
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''संघ परिवार के सच्चे हिंदू होने का दिखावा अब और भी बेनकाब हो गया है...मंदिर से जुड़े धन के गबन की वास्तविकता और इसकी व्यापकता का पता केवल उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में होने वाली स्वतंत्र जांच से ही चल सकेगा।''
भाषा हक अविनाश नेत्रपाल
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