शीर्ष न्यायालय के फैसले से पैदल चलने वालों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी
संतोष
- 22 Jun 2026, 08:01 PM
- Updated: 08:01 PM
नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय के फुटपाथ पर पैदल चलने को मौलिक अधिकार करार देने के फैसले का स्वागत करते हुए लोगों ने कहा कि इससे राहगीरों के अधिकारों को लेकर जागरूकता आएगी और सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को भी बल मिलेगा।
शीर्ष अदालत ने पिछले बृहस्पतिवार को एक अहम फैसले में कहा कि पैदल चलने के लिए तय किए गए रास्तों पर मोटर वाहनों के मुकाबले इस (पैदल चलने के) अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी और यह अनुच्छेद 19 (1) (डी) के तहत गारंटीकृत आने-जाने की स्वतंत्रता के अधिकार तथा अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार) समेत अन्य मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंह ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने फुटपाथ को पार्किंग स्थलों में तब्दील कर दिया है जहां गाड़ियां कतार से खड़ी दिख जाएंगी और उन पर लोगों के चलने की जगह नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय राजधानी में कहीं सड़क किनारे गाड़ी रोकेंगे तो दो-तीन सेकंड के अंदर ही एक व्यक्ति आएगा और 60 रुपये की पर्ची थमा देगा जो एनडीएमसी की होगी।"
सिंह ने दावा किया कि इन नगर निकाय एजेंसियों ने फुटपाथ को भाड़े पर दे दिया है।
हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता ने पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार बताने के शीर्ष अदालत के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस निर्णय के बाद लोग पैदल चलने वालों के अधिकारों को लेकर जागरूक होंगे तथा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को बल मिलेगा।
दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (आईआईटी-दिल्ली) के एक अध्ययन में पाया गया है कि दिल्ली की लगभग 44 फीसदी सड़कों पर 'फुटपाथ' नहीं हैं, जिससे पैदल चलने वालों को यातायात के बीच से गुजरना पड़ता है।
वहीं, दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 2025 में तकरीबन 649 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई और 1738 लोग जख्मी हुए, जिनमें काफी संख्या पैदल यात्रियों की थी।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में निजी कारों की चपेट में आने से सबसे ज्यादा 92 राहगीरों की मौत हुई। इसके बाद दोपहिया वाहनों की टक्कर से 75 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जबकि भारी परिवहन वाहन (एचटीवी) और मालवाहक वाहन 43 राहगीरों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार थे।
दिल्ली में रहने वाले कई लोगों का कहना है कि आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले फुटपाथ न होने की वजह से शहर में चलना-फिरना मुश्किल और कभी-कभी खतरनाक भी हो गया है।
दिल्ली निवासी संजय कुमार ने कहा कि फुटपाथों पर एमसीडी ने कब्जा कर रखा है और उनपर इतनी सारी गाड़ियां खड़ी होती हैं कि पैदल चला नहीं जा सकता है।
रोशन कुमार नामक व्यक्ति ने कहा कि सड़कों पर इतनी सारी गाड़ियां चलती हैं जिससे पैदल चलने वालों के लिए सड़क पर चलने की जगह नहीं होती है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर की पीठ ने कहा कि तय फुटपाथ पर पैदल चलने का नागरिक का मौलिक अधिकार सर्वोपरि है और इसे मोटर वाहनों की आवाजाही के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी।
न्यायालय की यह टिप्पणी मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में आई, जिसमें एक पिता ने अपने पांच साल के बेटे को स्कूल ले जाते समय खो दिया था।
भाषा नोमान नोमान संतोष
संतोष
2206 2001 दिल्ली