अरावली जैवविविधता उद्यान से दिल्ली को 30 लाख लीटर वर्षा जल संचय व बाढ़ कम करने में मिलती है मदद
अविनाश
- 22 Jun 2026, 06:44 PM
- Updated: 06:44 PM
नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) मानसून को लेकर दिल्ली की तैयारियों के बीच हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि अरावली जैवविविधता उद्यान हर साल लगभग 30 लाख लीटर बारिश का पानी एकत्र करने में मदद करता है। इससे बह जाने वाले पानी में कमी आती है जो जलभराव और शहरी बाढ़ का कारण बन सकता है।
अध्ययन के अनुसार, 692 एकड़ में फैले और दोबारा विकसित किए गए इस जंगल का काम सिर्फ शहरी इलाके के बीच हरियाली उपलब्ध कराना नहीं है।
इसमें कहा गया है कि लगभग 2.02 लाख पेड़ों वाला यह जंगल हर साल बह जाने वाले करीब 30 लाख लीटर पानी को रोकने में मदद करता है।
इससे भूजल स्तर को बहाल करने में मदद मिलती है और जमीन पर बारिश के पानी की गति धीमी हो जाती है, जिससे पानी पक्की सतहों पर तेजी से बहने के बजाय मिट्टी में अधिक समाता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अरावली जैवविविधता उद्यान एक महत्वपूर्ण 'भूजल एक्विफर रिचार्ज जोन' (भूजल भंडार को फिर से भरने वाला क्षेत्र) में स्थित है और भूमिगत जल भंडार को भरने में अहम भूमिका निभाता है।
''ए केस स्टडी ऑफ द रिस्टोर्ड अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क, दिल्ली, इंडिया'' नाम से यह अध्ययन दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कई विभागों और संस्थानों के शोधकर्ताओं ने किया है।
अध्ययन में कहा गया है, ''दिल्ली की जलवायु शुष्क-सर्दियों वाली आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय है, जो गर्म अर्ध-शुष्क जलवायु के करीब है। यहां सालाना औसतन 774.4 मिमी बारिश होती है, जिसमें से अधिकतर बारिश जुलाई और सितंबर के बीच मानसून के महीनों में होती है।''
पानी को नियंत्रित करने के अलावा, यह उद्यान हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि इसके पेड़ हर साल लगभग 126.89 टन वायु प्रदूषकों को हटाते हैं, जिससे लगभग 1.89 करोड़ रुपये मूल्य के पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि ये पेड़ हवा से 'पार्टिकुलेट मैटर' (पीएम) और अन्य हानिकारक प्रदूषकों को हटाने में मदद करते हैं। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि अलग-अलग तरह के शहर में स्थित जंगल हवा में मौजूद प्रदूषकों को रोकने और पर्यावरण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में खास तौर पर असरदार होते हैं।
इस अध्ययन के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने वर्ष 2023 में पार्क के लगभग 500 एकड़ क्षेत्र के पेड़-पौधों का सर्वेक्षण किया। उन्होंने 10 गुणा 10 मीटर के 83 'क्वाड्रैट' (माप के लिए तय किए गए हिस्से) बनाए और 80 प्रजातियों के 829 पेड़ों का डेटा दर्ज किया। टीम ने 'आई-ट्री इको' मॉडल के साथ-साथ स्थानीय मौसम और हवा की गुणवत्ता के डेटा का इस्तेमाल करके पारिस्थितिकी तंत्र संबंधी सेवाओं का आकलन किया, जिनमें कार्बन भंडारण, कार्बन अवशोषण, हवा से प्रदूषण हटाना और सतह पर जल बहाव को रोकना शामिल हैं।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश
2206 1844 दिल्ली