कार्यस्थल पर तनाव दूर करने के लिए योग बेहद जरूरी : सीजेआई
अविनाश
- 21 Jun 2026, 06:42 PM
- Updated: 06:42 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि इस भागदौड़ भरी और उथल-पुथल वाली दुनिया में शांति की तलाश के लिए योग एक शाश्वत रूपरेखा प्रदान करता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के अवसर पर शीर्ष अदालत परिसर में योग किया।
बारहवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, सीजेआई ने कहा कि इस सालाना कार्यक्रम ने कैलेंडर में अपनी स्थायी जगह बना ली है, लेकिन इसके आधिकारिक दर्जे से कहीं बढ़कर, असल में भारतीय विरासत के एक अहम हिस्से का जश्न मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ''सदियों से हमारी सभ्यता की समझ ने इस बात पर जोर दिया है कि सच्ची सेहत का मतलब सिर्फ शारीरिक फिटनेस नहीं है। यह मन, शरीर और आत्मा के बीच तालमेल बिठाने से संबंधित है। योग इस सोच को असल जिंदगी में उतारने का जरिया है, जो भागदौड़ भरी और उथल-पुथल वाली दुनिया में शांति पाने का एक सदाबहार तरीका प्रदान करता है।''
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने योग दिवस कार्यक्रम में शामिल न्यायालय के कर्मचारियों, न्यायाधीशों और वकीलों से कहा कि न्याय व्यवस्था में रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं।
उन्होंने कहा, ''हमें बहुत ज्यादा काम, अल्पावधि में काम पूरा करने का दबाव और न्याय-प्रशासन में मदद करने से जुड़े लगातार दबाव का सामना करना पड़ता है। इस माहौल का असर हमारी मानसिक स्पष्टता और शारीरिक ऊर्जा पर पड़ना तय है। ऐसे हालात में, जब काम की ज़िम्मेदारियां हावी हो जाती हैं, तो अपनी सेहत को नजरअंदाज़ करना आसान हो जाता है।''
उन्होंने कार्यस्थल पर योग के महत्व पर जोर देते हुए यह बात कही।
सीजेआई ने कहा कि यह आम गलतफहमी है कि योग के लिए शरीर का बहुत लचीला होना या घंटों खाली समय होना जरूरी है।
उन्होंने कहा, ''योग के मामले में मैं खुद अभी सीख ही रहा हूं, फिर भी मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि कुछ मिनट तक ध्यान से सांस लेने या 'बेसिक स्ट्रेचिंग' करने से भी तनाव से निपटने के आपके तरीके में जबरदस्त बदलाव आ सकता है। इससे मन शांत होता है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और शरीर में वह मजबूती आती है, जिसकी हमें अपने व्यस्त कार्यक्रम को बनाए रखने के लिए जरूरत होती है। अपनी सेहत का ध्यान रखना कोई विलासिता नहीं है; यह खुद पर और उस संस्था पर एक जरूरी निवेश है जिसके लिए हम काम करते हैं।''
सीजेआई ने कहा कि यह मौका एक साथ आने और योगाभ्यास करने का एक शानदार अवसर है, लेकिन असली मकसद इस एक सुबह (केवल 21 जून) से आगे के बारे में सोचना है।
उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बदलाव की शुरुआत करने का एक बेहतरीन मौका है, यह 'योग मैट' पर कदम रखने और इसे अपनी नियमित आदत बनाने का संकल्प लेने का क्षण है। असली फ़ायदे साल में एक बार की कसरत से नहीं मिलते; वे निरंतरता से मिलते हैं। आइए, इस दिन को एक स्वस्थ दिनचर्या की शुरुआत बनाएं, चाहे उसका मतलब सुबह दस मिनट का ध्यान हो या काम के बाद शाम को थोड़ी देर स्ट्रेचिंग।''
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कार्यक्रम को अच्छे ढंग से आयोजित करने के लिए रजिस्ट्री टीम का धन्यवाद किया और शीर्ष अदालत के कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया कि वे आज के सत्र से मिले अनुभवों को अपने काम की जगह और घर पर भी अपनाएं।
उन्होंने कहा, ''आइए, हम सेहत और जागरूकता को सिर्फ़ आज ही नहीं, बल्कि हर दिन प्राथमिकता दें।''
भाषा सुरेश अविनाश
अविनाश
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