राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं योग और समुद्री सामर्थ्य: मोदी
नेत्रपाल
- 21 Jun 2026, 03:12 PM
- Updated: 03:12 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
कोलकाता, 21 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कोलकाता में अपने दो बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में भारत के भविष्य को लेकर व्यापक दृष्टिकोण पेश करते हुए एक ओर योग के माध्यम से आंतरिक संतुलन और सामूहिक कल्याण पर जोर दिया तो दूसरी ओर राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता एवं समुद्री सामर्थ्य को रेखांकित किया।
मोदी ने शहर के प्रतिष्ठित 'रेड रोड' पर आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह और बाद में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर स्वदेश निर्मित तीन नौसैन्य पोतों को नौसेना में शामिल किए जाने के कार्यक्रम में इस बात को रेखांकित किया कि व्यक्तिगत अनुशासन और राष्ट्रीय क्षमता मिलकर किस प्रकार और अधिक मजबूत एवं आत्मविश्वासी भारत का निर्माण करते हैं।
उनका एक संदेश सद्भाव, स्वास्थ्य एवं शांति पर केंद्रित था जबकि दूसरे संदेश में सुरक्षा, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति और सामरिक प्रभाव के महत्व को रेखांकित किया गया।
मोदी ने 'रेड रोड' पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह के लिए एकत्र हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है बल्कि वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दुनियाभर में जारी कई संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच मोदी ने कहा कि भारत की यह प्राचीन पद्धति केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है।
प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि काम, खानपान और नींद में संतुलन दुखों को दूर करने की कुंजी है।
मोदी ने कहा, ''यही संतुलन जीवन की तरह योग का भी मूल आधार है।''
उन्होंने कहा, ''आधुनिक जीवनशैली में अधिकतर लोग इस संतुलन को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योग हमें संतुलित ढंग से जीने की कला सिखाता है। यह हमें बताता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। जब हम अपने शरीर का सही तरीके से संचालन करना सीख जाते हैं तो स्वस्थ रहना हमारी आदत बन जाता है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि योग मानसिक स्वास्थ्य और आत्मबोध के जरिये शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा, ''क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी चेतना न केवल मन को शांति देती है बल्कि वैश्विक शांति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। इसीलिए योग केवल हमारी व्यक्तिगत जीवनशैली के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए भी आवश्यक है।''
मोदी ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब दुनिया के कई क्षेत्र युद्ध और कूटनीतिक तनावों से जूझ रहे हैं। यह भारत द्वारा संवाद, सह-अस्तित्व और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर लंबे समय से दिए जा रहे जोर को भी रेखांकित करती है।
मोदी ने कहा, ''आइए, हम संकल्प लें कि योग को केवल किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित नहीं रखेंगे बल्कि इसे अपने जीवन, अपने परिवारों और भावी पीढ़ियों के जीवन का हिस्सा बनाएंगे।''
मोदी ने कहा कि योग राष्ट्रीय और सांस्कृतिक सीमाओं से परे एक वैश्विक आंदोलन बन गया है।
उन्होंने कहा, ''पृथ्वी पर साल का सबसे लंबा दिन 21 जून अब योग के कारण सबसे बड़े सामुदायिक उत्सव का दिन बन गया है। योग लोगों को जोड़ता है। मैं इस अवसर पर विश्व के लोगों को बधाई देता हूं।''
मोदी ने इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग' का उल्लेख करते हुए कहा कि योग हर आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी है।
उन्होंने कहा, ''योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। यह मानवीय चेतना की अभिव्यक्ति है।''
मोदी ने बढ़ती उम्र के साथ मनुष्य की क्षमताओं को बनाए रखने में योग की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, ''जब हम बढ़ती उम्र में निरोग रहने के लिए योग की बात करते हैं तो हम यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर सकते हैं कि उम्र बढ़ने से मनुष्य की क्षमताएं कम न हों।''
मोदी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर और महर्षि अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव जीवन की सार्थकता समाज, दुनिया और स्वयं से जुड़ने में निहित है।
उन्होंने कहा, ''जुड़ाव ही योग का मूल विचार है। महर्षि अरविंद ने कहा था कि योग हमारे जीवन में मौजूद है, चाहे हमें इसका अहसास हो या न हो। जब योग हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है तो यह मानव एकता का आधार बनता है।''
सफेद टी-शर्ट और सफेद पैंट पहने मोदी ने 'रेड रोड' पर हजारों लोगों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया।
उन्होंने सभी आयु वर्ग के लोगों के साथ योगासन किए और 40 मिनट के सत्र के दौरान प्रतिभागियों के बीच घूमकर योग प्रोटोकॉल के अनुसार किए जा रहे आसनों को करीब से देखा। उन्होंने कुछ प्रतिभागियों की मुद्राएं सुधारने में भी मदद की।
राज्यपाल आर. एन. रवि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पश्चिम बंगाल सरकार के कई मंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
मोदी ने बाद में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर मानव क्षमताओं से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि आर्थिक एवं सामरिक प्रभाव के लिए मजबूत समुद्री ताकत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ''मजबूत समुद्री क्षमताएं किसी देश के आर्थिक और सामरिक प्रभाव को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।''
मोदी ने कहा कि भारत इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझता है और इसके लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने स्वदेश निर्मित तीन पोतों-'स्टील्थ फ्रिगेट' 'दूनागिरि', सर्वेक्षण पोत 'संशोधक' और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अग्रय' को नौसेना में शामिल किया।
इन पोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना के 'वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो' ने तैयार किया है और इनका निर्माण कोलकाता स्थित 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड' ने किया है। इनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और इनके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) ने भागीदारी की है।
मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा, ''हमारी क्षमताओं की पहचान आत्मनिर्भरता से है, दुनिया के लिए बाजार बनने से नहीं।''
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार देश बनकर नहीं रहना चाहता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना में शामिल कर अपनी बढ़ती समुद्री ताकत का प्रदर्शन पहले ही कर चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 40 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गई हैं जबकि 45 बड़े नौसैनिक मंच निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने कहा, ''कोई भी देश समुद्री ताकत के बिना बड़ी शक्ति नहीं बन सकता। विकास, सुरक्षा और समृद्धि समुद्र से जुड़े हुए हैं।''
इन कार्यक्रमों के साथ प्रधानमंत्री का पश्चिम बंगाल का दो दिवसीय दौरा संपन्न हो गया। इस दौरे की शुरुआत शनिवार को हुगली जिले के तारकेश्वर में आयोजित राज्यस्तरीय 'पश्चिमबंग दिवस' समारोह से हुई थी जिसमें मोदी ने कहा था कि राज्य ''अपनी बेड़ियों से मुक्त हो गया है'' और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के तहत विकास की नयी यात्रा पर निकल पड़ा है।
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