बंगाल सरकार सहेजेगी श्यामा प्रसाद की विरासत, पिछली सरकारों ने किया था नजरअंदाज: शुभेंदु
राजकुमार
- 20 Jun 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
(तस्वीरों के साथ)
तारकेश्वर, 20 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को संरक्षित करने संबंधी योजनाओं की शनिवार को घोषणा करते हुए आरोप भी लगाया कि पिछली सरकारों ने 20 जून के महत्व को दबाने और बंटवारे के दौरान इस राज्य के भारत का हिस्सा बने रहने में मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका को नजरअंदाज किया।
अधिकारी ने हुगली जिले के तारकेश्वर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राज्यपाल आर. एन. रवि की मौजूदगी में 'पश्चिमबंग दिवस' समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 20 जून बंगाल के इतिहास में एक अहम मोड़ था, जब पश्चिमी बंगाल के विधायकों ने भारत के साथ बने रहने के पक्ष में वोट दिया, जिससे राज्य के गठन का रास्ता साफ हुआ।
उन्होंने कहा, ''वर्षों से 20 जून के महत्व को दबाने और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका को मिटाने की लगातार कोशिशें की गई हैं। हमारी सरकार बंगाल के इतिहास के इस अध्याय को उसका सही स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के गठन से जुड़ी घटनाओं की याद में और बंटवारे के समय इस इलाके को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए लड़ने वालों के सम्मान में पूरे राज्य में 'पश्चिमबंग दिवस' मनाया जा रहा है।
उन्होंने आजादी से पहले की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि मुखर्जी के नेतृत्व में चार से सात अप्रैल, 1947 तक तारकेश्वर में आयोजित एक हिंदू महासम्मेलन में पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल करने की मांग करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया था।
अधिकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव उन बंगाली हिंदुओं की आकांक्षाओं को दर्शाता था, जो विभाजन के कारण पैदा हुई अनिश्चितताओं और उथल-पुथल के बीच बंगाल के पश्चिमी हिस्से को भारत के साथ रखना चाहते थे।
उन्होंने 20 जून, 1947 को बंगाल विधानसभा में हुए एक मतदान का भी उल्लेख किया और दावा किया कि मुखर्जी के नेतृत्व में विधायकों ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिससे अंततः पश्चिम बंगाल को भारत के भीतर रह पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारें मुखर्जी के योगदान को उचित मान्यता देने में विफल रहीं , उन्होंने कभी भी इस दिन को आधिकारिक तौर पर नहीं मनाया।
उन्होंने कहा, ''तारकेश्वर के ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखते हुए, राष्ट्रवादी डबल-इंजन सरकार पहली बार यहां आधिकारिक तौर पर पश्चिमबंग दिवस मना रही है। हमें इस पर गर्व है।''
मुखर्जी की विरासत को जीवंत रखने के लिए कई उपायों की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हुगली जिले के 'जीरात' में उनके पैतृक घर का अधिग्रहण करने और उसे एक स्मारक एवं पुस्तकालय के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों के तहत कोलकाता में उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 23 जून को मुखर्जी का 'शहादत दिवस' मनाएगी और छह जुलाई को उनकी 125वीं जयंती पूरी गरिमा के साथ मनाएगी।
इससे पहले, कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए अधिकारी ने उन्हें 'दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता' बताया और रविवार को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' के कार्यक्रमों के लिए कोलकाता लौटने से पहले तारकेश्वर में पश्चिमबंग दिवस समारोह में शामिल होने के वास्ते अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालने के लिए उनका धन्यवाद किया।
मोदी अपराह्न में तारकेश्वर पहुंचे और सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच जश्न में शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों की एक बड़ी भीड़ शामिल हुई।
भाषा सुरेश राजकुमार
राजकुमार
2006 2038 तारकेश्वर