पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत आठ लोग कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में बरी
नेत्रपाल
- 20 Jun 2026, 02:48 PM
- Updated: 02:48 PM
मुंबई, 20 जून (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल और सात अन्य लोगों को वर्ष 2006 में महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर तथा उनके चालक की हत्या के मामले में शनिवार को बरी कर दिया।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश सत्य नारायण नवंदर ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश की पूरी कड़ी को साबित करने में विफल रहा।
अभियोजन पक्ष का मामला आरोपी से सरकारी गवाह बने पारसमल जैन की गवाही पर आधारित था। हालांकि, अदालत ने उसकी गवाही को संदेहास्पद मानते हुए खारिज कर दिया और कहा कि इससे घटनाक्रम की पूरी कड़ी सिद्ध नहीं होती है।
पद्मसिंह पाटिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पूर्व सांसद हैं और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सौतेले भाई हैं। वह तथा सात अन्य लोग इस हत्या मामले में आरोपी थे।
पवनराजे निंबालकर के पुत्र ओमप्रकाश राजे निंबालकर वर्तमान में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से लोकसभा सदस्य हैं।
तीन जून 2006 को पवनराजे निंबालकर और उनके चालक समद काज़ी मुंबई से उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जा रहे थे, इसी दौरान नवी मुंबई के कालंबोली क्षेत्र में दो हमलावरों ने उनकी कार को रोक लिया और गोलीबारी की, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
शुरुआत में इस मामले की जांच नवी मुंबई पुलिस ने की थी, लेकिन पवनराजे निंबालकर की पत्नी द्वारा जांच की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किए जाने के बाद बंबई उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच सौंपने का आदेश दिया था।
सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद पद्मसिंह पाटिल को जून 2009 में गिरफ्तार किया था। हालांकि, उसी वर्ष सितंबर में रायगढ़ जिले के अलीबाग स्थित सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी।
इस मामले में पाटिल के अलावा, अन्य आरोपियों में लातूर के व्यवसायी सतीश मंदाडे, सेवानिवृत्त अधिकारी मोहन शुक्ला और हमलावर शामिल थे।
केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल पर आरोप था कि उन्होंने आपराधिक साजिश रची और राजनीतिक एवं व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के कारण अपने चचेरे भाई पवनराजे निंबालकर को खत्म करने के लिए लिए धन दिया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पारसमल जैन ने शुरुआत में पवनराजे निंबालकर की हत्या के लिए मोहन शुक्ला और सतीश मंदाडे से 30 लाख रुपये की सुपारी स्वीकार की थी।
बाद में, उसे माफी दे दी गई क्योंकि वह अन्य आरोपियों के खिलाफ सरकारी गवाह बन गया।
इस मामले की सुनवाई जुलाई 2011 में शुरू हुई। 15 साल तक चली इस सुनवाई के दौरान, विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत कुल 128 गवाहों के बयान दर्ज किए।
इस मामले में हजारे का नाम तब सामने आया जब जैन ने स्वीकार किया कि पाटिल ने उसी समय उन्हें भी खत्म करने की सुपारी दी थी।
हज़ारे ने पाटिल से धमकियां मिलने के बारे में गवाही दी थी।
भाषा शोभना रंजन नेत्रपाल
नेत्रपाल
2006 1448 मुंबई