कांग्रेस के भीतर राहुल का समर्थन हो रहा कम: भाजपा
रंजन
- 20 Jun 2026, 01:17 PM
- Updated: 01:17 PM
नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा से जुड़े कांग्रेस सांसद शशि थरूर के कथित बयान का हवाला देते हुए शनिवार को दावा किया कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के भीतर समर्थन खो रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने नाविकों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपनाए गए रुख की शशि थरूर की सराहना, राहुल गांधी के रुख के विपरीत है।
उन्होंने वीडियो जारी कर एक बयान में कहा, "यह शर्मनाक है। कल (शुक्रवार को) राहुल गांधी का जन्मदिन था, लेकिन उन्हें कोई उपहार नहीं मिला। डॉ. शशि थरूर ने इसी मुद्दे पर राहुल गांधी के रुख का खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने नाविकों के मुद्दे पर भारत का पक्ष बेहद मजबूती से रखा और देश की स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।"
भाजपा नेता ने दावा किया कि थरूर ने मोदी के नेतृत्व गुणों की भी प्रशंसा की है।
उन्होंने कहा, "इतना ही नहीं, थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी के दृ्ष्टिकोण, अपनी बात रखने की क्षमता, ऊर्जा व वक्तृत्व शैली की भी भरपूर प्रशंसा की है। थरूर ने कहा है कि मोदी ने भारतीयों के जीवन पर अपनी छाप छोड़ी है।"
पूनावाला ने राहुल गांधी को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा और दावा किया कि पार्टी के कुछ नेता इस विचार से सहमत नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "एक तरफ कांग्रेस कहती है 'कूल पीएम राहुल' और दावा करती है कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन उनकी अपनी पार्टी के सांसद भी शायद इस बात पर विश्वास नहीं करते।"
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जनता का समर्थन खो दिया है और उन लोगों का साथ भी खो दिया है, जो कभी उनके करीबी माने जाते थे।
पूनावाला ने कहा, " इससे साबित होता है कि राहुल गांधी ने जनमत खो दिया है, क्योंकि वह 99 चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने उन लोगों का समर्थन भी खो दिया है, जो कभी उनके करीब थे, चाहे वह रामचंद्र गुहा हों या शशि थरूर।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ सहयोगी राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
पूनावाला ने कहा, "अब उन्हें अपने गठबंधन के सहयोगियों का समर्थन भी हासिल नहीं है। चाहे वामपंथी दल हों या द्रमुक, वे राहुल के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। राहुल गांधी एक 'रील नेता' बनकर रह गए हैं। वह एक वास्तविक नेता नहीं हैं।"
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन
2006 1317 दिल्ली